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View Full Version : aaj ki yuva pidhi


soni pushpa
05-01-2017, 02:08 PM
hello friends .. sabko naye sal ki anekanek shubhkamanayen ..

sorry aajkal kinhi karno ki vajah se aapki sewa me upasthit nahi ho paa rahi hun dil se mafi chahti hun .

friends bahut lamba arsa hua hamane ab tak koi bahas me bhag nahi liya shayd 2016 ka pura sal debet section me khali hi raha tha so aaj kuchh man ke vicharon ke sang mai aap sabko ek shirashaK

"AAJ KI YUVA PIDHI "
PAR DEBET KARNA CHAHUNGI KYA AAP SAB MERA SATH DENGE ?

YADI AAP MERA SATH DENGE TO HO SAKTA HAI AAPKE GHAR ME PAL RAHE IS BADE PROBLEM KA SAMADHAN SHAYD MIL JAYE .. KYUNKI AAJ KA YUVA VARG SARI SAMAJH HONE KE BAVJUD BHI , MAN SE SACHHA HONE KE BAD BHI BHAGWAN OR DHARM KO MANANE KE BAD BHI KYUN ANDHERON SE GHIRTA JA RAHA HAI KYUN AAJ USE SHARAB SIGARETT JEISI KHARAB ADATON NE GHER RAKHA HAI ?KYYON WAH JHUTH KA SAHAARA LE RAHA HAI ISKI VAJAH PAR HAME SOCHNA HAI TAKI KUCHH GHARON ME PAL RAHA YAH NASOOR SARE SAMAAJ ME FAILKAR HAJARO LAKHON GHARON KA SATYANASH NA KAR DE .

AAP SABSE PRARTHANA HAI IS BAHAS ME SAB APNE VICHAAR AVASHY RAKHEN


(mafi chahti hun kinhi karan vash mai hindi me nahi likh paai )
SADHANYWAD

Deep_
05-01-2017, 04:35 PM
बहुत अच्छा मुद्दा उठाया है पुष्पा जी । युवा पीढी होती ही एक जोश भरी लहर की तरह । अगर यह लहर गलत दिशा में बहे तो घरों के घर उजड़ जातें है और अगर सही दिशा में बहे तो नई क्रांति ले आती है ।
शायद ईसीलिए सभी लोगों की नज़रें और उम्मीदें दोनों युवा पीढी पर होती है । कई युवा यह बात अच्छी तरह समझतें है ।
लेकिन अफसोस, एसे युवाओं की मात्रा भी उतनी ही है जो समझतें है की व्यसन और बाकी सभी बुरी चीजों में जिन्दगी का असली लुफ्त होता है ।

soni pushpa
06-01-2017, 01:46 AM
Sabse pahle apka swagat hai Deep ji ,
is bahas me bhag lene ke liye bahut bahut dhanywad .

ji sahi kaha aapne ki joshbhari lahar ki tarah hoti hai ye yuva pidhi .. is josh ko galat rah ko sahi raah me keise mode ham ye hi ab dekhna hai kyunki ab bhi kahin ek asha ki kiran hai ab bhi aaj ke navyuvano me badlav laya ja sakta hai jarurat hai to andhadhundh ho rahi videshon ki nakal ko roka jay kintu ye aaj ke jamane ke liye ashakya hoga kyunki videshi nakal ke liye ab logon ke pas karodo sadhan hain , jisme sab jante hain fon , internet, t v sabse aage hai .. jiski vajah se bahut jaldi adhunikta ka rang logon par chha sa gaya hai par han sirf ye hi doshi nahi internet ya tv ya fon ye sab to hamari suvidha ke liye hain par iinka galat upyog hame ulti disha ki or le ja raha hai .

nashe ko adhunikta ka nam dekar nashe ki lat me khoye hain log . aaj ki bachhiyan sigarets ke sath hath me sharab ke glass liye partyon me ghumne ko moderan hona samjhti hai par koi inhe samjhaye ki kalpna chavda bane , sanchi sindhu bane ya fir anya kisi kshetra me aapni pahchan banaye or dunia ko bataye ki adhunikta ise kahte hain ki jo bhartiy naari ghar ki chaar deevari me chulhe chouke me apna jivan beeta deti thi ab wo hi naari aaj kahan se kahan ja pahunchi hai na ki nashe ko ya ang prdarshan ko adhunikta kaha ja sakta hai .

is daldal se aaj ke yuvaon ko keise dur kiya jay is par ap sab apne apne vichar rakhenge to mujhe behad khushi hogi .. dhanywad

rajnish manga
07-01-2017, 04:54 PM
धन्यवाद, बहन पुष्पा जी. चर्चा के लिये आपने बहुत गंभीर विषय का चुनाव किया है. स्वाभाविक है कि समाज में होती रहने वाली कुछ शर्मनाक घटनाओं को देखते हुये इस बारे में देश के हर वर्ग को चिंता करना और सकारात्मक बहस करना जरुरी हो जाता है.
शुरुआत में आपने युवाओं का नशे और धूम्रपान आदि कुछ बुरी आदतों की ओर ध्यान आकर्षित किया है तथा इन्हें कैसे दूर किया जाये, इस पर विचार आमंत्रित किये हैं.

rajnish manga
07-01-2017, 09:01 PM
युवा वर्ग में दिखाई देने वाली इन नेगेटिव आदतों के पीछे निम्नलिखित कारण विशेष रूप से जिम्मेदार हैं:

1. पारिवारिक संबंधों में परंपरागत मूल्यों का ह्रास. मेरा यह मानना है कि माता पिता का रोल युवाओं के लिये इतना ही रह गया है कि वे उनकी हर प्रकार की ज़रूरतें पूरी करते रहें लेकिन उनके व्यवहार की खामियों पर कोई टिप्पणी न करें. उन्हें परम्परा के नाम पर पुरानी (यानी डाकियानूसी) बातें सिखाने की कोशिश न करें. दूसरी ओर, माता-पिता द्वारा भी घर में ऐसे वातावरण का निर्माण नहीं किया जाता जिससे बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति सहज खिंचाव या लगाव पैदा हो. इससे परिवार के सभी सदस्यों में आपसी सद्भाव और परस्पर आदर व समझ विकसित हो. जब हर परिवार इन सिद्धांतों पर चलेगा तो परंपरागत मूल्य अपने आप स्थापित होंगे.

2. स्कूलों या कॉलेजों में छात्रों के चरित्र निर्माण की ओर ध्यान नहीं दिया जाता बल्कि फेक्ट्रीयों के उत्पादन की तरह शिक्षित लोगों का टर्नओवर बढ़ाया जा रहा है. इसमें गुणात्मक विकास से ज्यादा संख्या बढ़ने पर जोर होता है.

3. क़ानूनी संस्थाएं या पुलिस भी या तो संवेदनशीलता की कमीं से, ट्रेनिंग की कमीं से या आवश्यकता के हिसाब से सुरक्षा बलों के न होने से भी युवको को मनमानी करने का मौक़ा मिल जाता है. नशीले पदार्थ ही नहीं कई अन्य बुराइयाँ भी ऐसे वातावरण में युवकों में पनपने लगती हैं.

Deep_
09-01-2017, 10:01 AM
युवा वर्ग में दिखाई देने वाली इन नेगेटिव आदतों के पीछे निम्नलिखित कारण विशेष रूप से जिम्मेदार हैं:

1. पारिवारिक संबंधों में परंपरागत मूल्यों का ह्रास. मेरा यह मानना है कि माता पिता का रोल युवाओं के लिये इतना ही रह गया है कि वे उनकी हर प्रकार की ज़रूरतें पूरी करते रहें लेकिन उनके व्यवहार की खामियों पर कोई टिप्पणी न करें. उन्हें परम्परा के नाम पर पुरानी (यानी डाकियानूसी) बातें सिखाने की कोशिश न करें. दूसरी ओर, माता-पिता द्वारा भी घर में ऐसे वातावरण का निर्माण नहीं किया जाता जिससे बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति सहज खिंचाव या लगाव पैदा हो. इससे परिवार के सभी सदस्यों में आपसी सद्भाव और परस्पर आदर व समझ विकसित हो. जब हर परिवार इन सिद्धांतों पर चलेगा तो परंपरागत मूल्य अपने आप स्थापित होंगे.

2. स्कूलों या कॉलेजों में छात्रों के चरित्र निर्माण की ओर ध्यान नहीं दिया जाता बल्कि फेक्ट्रीयों के उत्पादन की तरह शिक्षित लोगों का टर्नओवर बढ़ाया जा रहा है. इसमें गुणात्मक विकास से ज्यादा संख्या बढ़ने पर जोर होता है.

3. क़ानूनी संस्थाएं या पुलिस भी या तो संवेदनशीलता की कमीं से, ट्रेनिंग की कमीं से या आवश्यकता के हिसाब से सुरक्षा बलों के न होने से भी युवको को मनमानी करने का मौक़ा मिल जाता है. नशीले पदार्थ ही नहीं कई अन्य बुराइयाँ भी ऐसे वातावरण में युवकों में पनपने लगती हैं.


मैं समज ही नहीं पा रहा था की अपने विचार कैसे रखुं । लेकिन रजनीश जी ने बहुत सुचारु और वर्णनात्मक ढंग से पुरी बात बता दी । मै भी कुछ यही कहना चाहता था ।

soni pushpa
09-01-2017, 11:54 PM
[QUOTE=rajnish manga;560153][size=3]युवा वर्ग में दिखाई देने वाली इन नेगेटिव आदतों के पीछे निम्नलिखित कारण विशेष रूप से जिम्मेदार हैं:

1. पारिवारिक संबंधों में परंपरागत मूल्यों का ह्रास. मेरा यह मानना है कि माता पिता का रोल युवाओं के लिये इतना ही रह गया है कि वे उनकी हर प्रकार की ज़रूरतें पूरी करते रहें लेकिन उनके व्यवहार की खामियों पर कोई टिप्पणी न करें. उन्हें परम्परा के नाम पर पुरानी (यानी डाकियानूसी) बातें सिखाने की कोशिश न करें. दूसरी ओर, माता-पिता द्वारा भी घर में ऐसे वातावरण का निर्माण नहीं किया जाता जिससे बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति सहज खिंचाव या लगाव पैदा हो. इससे परिवार के सभी सदस्यों में आपसी सद्भाव और परस्पर आदर व समझ विकसित हो. जब हर परिवार इन सिद्धांतों पर चलेगा तो परंपरागत मूल्य अपने आप स्थापित होंगे.

2. स्कूलों या कॉलेजों में छात्रों के चरित्र निर्माण की ओर ध्यान नहीं दिया जाता बल्कि फेक्ट्रीयों के उत्पादन की तरह शिक्षित लोगों का टर्नओवर बढ़ाया जा रहा है. इसमें गुणात्मक विकास से ज्यादा संख्या बढ़ने पर जोर होता है.


सबसे पहले आपका स्वागत है भाई साथ ही बहुत बहुत धन्यवाद आपकी अपनी अमूल्य राय देने के लिए आपने सुलझे विचारों से हमें अवगत करने के लिए .
आपने बेहद सुरुचिपूर्ण ढंग से और सविस्तार से सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपने विचार यहाँ रखे शायद मैं मन की बात जुबां पर नहीं ला पा रही थी शायद शब्द नहीं मिल रहे थे इसलिए ही कहती हूँ न मैं हमेशा की आपसे हम सबको बहुत कुछ सीखना बाकि है भाई आशा है इसी तरह आप हम सबका मार्गदर्शन करते रहेंगे

सही कहा आपने भाई आपने जितने कारन दिए सब सही हैं किन्तु अपनी बात को सही ढंग से समझाने केलिए मैं एक पार्टी की आँखों देखि बात यहाँ अवश्य रखना चाहूंगी , मैंने देखा कुछ बालिकाओं को जिन्होंने हाथों में शराब के गिलास पकडे हुए थे अजीब से कपडे थे उनके और सिगरेट के कश लिए जा रही थीं वें इतने में जिनके घर पार्टी थी ऊसी घर की एक बुजुर्ग महिला आइन तब सबने उनके पैर छुए और आशीर्वाद भी लिए अब सवाल ये उठता है की आपको अपनी संस्कृति याद है की बड़े आयें तो उनके सम्मान में खड़े हो जाओ बड़ों के पैर छुओ फिर ये क्यों वो लोग भूल रहे हैं की हमारी सभ्यता हमें दारू पीना सिगरेट पीना नशा करना नहीं सिखाती नशे में धुत होकर अश्लीलता करना नहीं सिखलाती हमारी सभ्यता और संस्कृति को आज विदेशी लोग नमन कर रहे हैं तब हम क्यूँ अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं ? याने ये दोहरा बर्ताव मेरी समझ से बहार था भाई

बचपन से ही बच्चे के मन में ये बात बिठा दी जाय की नशा कितना नुकसान देह है हमारे जीवन के लिए , नशा फिर वो चाहे सिगरेट हो दारू हो या अफीम ,गांजा ,या चरस का हो वो बर्बादी की और ही ले जाता है हरेक इन्सान को तो शायद समाज में कुछ फीसदी सुधार होने की सम्भावना है .
. कुछ फीसदी इसलिए कहा क्यूंकि आजकल बच्चे जितना स्कुल कॉलेज में नहीं सीखते उससे कहीं हजारो गुना ज्यदा इन्टरनेट से सब जानकारियां हासिल करते हैं इसलिए एईसी चीज़े नेट में न देख सके बच्चे इसके लिए शासन के द्वारा कदम उठाये जाय तब भी शायद कुछ फर्क पड़े .

धयवाद भाई .. आशा है इस बहस में आपका सहयोग हमें फिर से मिलेगा .

soni pushpa
10-01-2017, 12:05 AM
मैं समज ही नहीं पा रहा था की अपने विचार कैसे रखुं । लेकिन रजनीश जी ने बहुत सुचारु और वर्णनात्मक ढंग से पुरी बात बता दी । मै भी कुछ यही कहना चाहता था ।

जी सही कहा आपने दीप जी भाई जी ने बहुत ही सरलता से सही शब्दों में हमें आज की युवा पीढ़ी को लेकर समझाया है .

कई बार सोचती हूँ उन माँ बाप की हालत क्या होगी जिनके बच्चे नशे के गुलाम बन गए हैं जो माँ बाप न बच्चे की बर्बादी को सह सकतें हैं न देख पाते हैं

नशा तो बच्चे करते हैं किन्तु समाज में माँ बाप को शर्मिंदा होना पड़ता है बेचारे कुछ बोल नहीं पाते बच्चे का स्वास्थ्य बिगड़ते देखते हैं पैसों की बर्बादी देखते हैं एइसे बच्चों के माँ बाप .कितने विवश हैं. .

Deep_
10-01-2017, 10:08 AM
[QUOTE=rajnish manga;560153][size=3]
मैंने देखा कुछ बालिकाओं को जिन्होंने हाथों में शराब के गिलास पकडे हुए थे अजीब से कपडे थे उनके और सिगरेट के कश लिए जा रही थीं वें इतने में जिनके घर पार्टी थी ऊसी घर की एक बुजुर्ग महिला आइन तब सबने उनके पैर छुए और आशीर्वाद भी लिए अब सवाल ये उठता है की आपको अपनी संस्कृति याद है की बड़े आयें तो उनके सम्मान में खड़े हो जाओ बड़ों के पैर छुओ फिर ये क्यों वो लोग भूल रहे हैं की हमारी सभ्यता हमें दारू पीना सिगरेट पीना नशा करना नहीं सिखाती नशे में धुत होकर अश्लीलता करना नहीं सिखलाती हमारी सभ्यता और संस्कृति को आज विदेशी लोग नमन कर रहे हैं तब हम क्यूँ अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं ? याने ये दोहरा बर्ताव मेरी समझ से बहार था भाई

रोचक प्रसंग है पुष्पा जी । यह भी सही है युवा पीढी अपने मुल्यों को भुली नहीं है । उन सभी को मां-बाप से संस्कार तो मिले ही है और वे उनकी ईज्जत भी करतें है । लेकिन मोर्डन सोसायटी के तेज बहाव और बदलाव में सभी बहे जा रहे है । सच बताउं तो उनको कहीं न कहीं अपराध भावना महसुस होती होगी जब वे व्यसन करतें है ।
आज की पीढी को संस्कार मिले ही है लेकिन मुझे शंका है की वे आनेवाली पीढी तक उन्हें पहुंचा पाएंगे या नहीं ।

soni pushpa
13-01-2017, 11:30 AM
[QUOTE=soni pushpa;560168]

रोचक प्रसंग है पुष्पा जी । यह भी सही है युवा पीढी अपने मुल्यों को भुली नहीं है । उन सभी को मां-बाप से संस्कार तो मिले ही है और वे उनकी ईज्जत भी करतें है । लेकिन मोर्डन सोसायटी के तेज बहाव और बदलाव में सभी बहे जा रहे है । सच बताउं तो उनको कहीं न कहीं अपराध भावना महसुस होती होगी जब वे व्यसन करतें है ।
आज की पीढी को संस्कार मिले ही है लेकिन मुझे शंका है की वे आनेवाली पीढी तक उन्हें पहुंचा पाएंगे या नहीं ।




जी सही कहा आपने दीप जी अगली पीढ़ी का हाल आज से शायद और ही बुरा होगा यदि अब भी इस तरफ ध्यान न दिया गया . बहुत बहुत धन्यवाद आपका इस बहस को आगे बढ़ने के लिए .