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View Full Version : कोई तो हमसफ़र हो ।


omprakashyadav
31-08-2013, 01:49 PM
कोई तो हमसफ़र हो । सुबह सूरज की पहली किरण से लेकर शाम के ढलते सूरज की
आखिरी किरण तक हमारी जिन्दगी इतनी व्यस्त रहती है की
हमें अपने बारे में सोचने का वक़्त ही नहीं मिलता ।ऐसे
लगता है जैसे हम जिन्दगी को नहीं जिन्दगी हमें चला रही होती
है ।काम ,काम और बस काम ।शाम को थक -हार कर हम घर
आते है।रात आने पर हम छत पर चले जाते है और एकदम अकेले
हो जाना चाहते है ।सारी दुनिया से बेखबर ।हम चुपचाप आँख बंद
कर लेट जाते है।रात की चांदनी हमें अपने आँचल में ढक लेती है ।
चाँद सारी दुनिया को निहारता और अपनी प्रियवर को खोजता आगे
बढता रहता है ।तभी रात की शीतल हवा हमारे बदन को छूकर
किसी का एहसास दिला जाती है ।जो हमारे दिल के सबसे करीब
होता है ।और हम उसके सपनो में खोते चले जाते है।और यही से
शुरू होती है पिछली रात की अधूरी कहानी जो कल रात अधूरी
रह गयी थी ।हम उसे अपने पास महसूस करने लगते है, उससे बाते
करने लगते है ,वादे करते है और सुनहरे भविष्य के सपने देखने लगते
है। और एक दुसरे में खोते चले जाते हैऔर इसी कसमकस में कब नींद
हमें अपने आगोश में समेट लेती है पता ही नहीं चलता ।
ऐसे आलम में बस यही कहने को जी चाहता है -
रातो का सफ़र अब जारी हुआ, कोई नहीं है हम-दम मेरा
तुम बन के मेरी हमसफ़र ,अब तुम मेरे साथ चलो ।
तारे तुझको देख रहे है ,अभी चाँद भी तुझको छेड़ेगा
छुप कर मेरे सीने में अब तुम मेरे साथ चलो ।
कुछ वादे किये थे मिलकर हमने, देखे थे कुछ सपने हमने
पूरा करने उन सपनो वादों को अब तुम मेरे साथ चलो ।
दिन के उजालो में गर हम निकले, देखेगी दुनिया चोर नजर से
हो के निडर रात की सुन्दर आभा में, अब तुम मेरे साथ चलो ।
रहेंगे जब तक चाँद सितारे कभी ख़तम न होगा अपना सफ़र
भूल के तुम ये दुनिया सारी अब तुम मेरे साथ चलो ।

rajnish manga
31-08-2013, 10:16 PM
आपके पास बहुत सशक्त अभिव्यक्ति के लिए आवश्यक शब्दावली तथा वैचारिक परिपक्वता मौजूद है. काव्यात्मक स्पंदन वाली इस सुन्दर रचना के लिए मेरी बधाई व धन्यवाद स्वीकार कीजिये, ओम प्रकाश जी. हार्दिक शुभकामनायें.

omprakashyadav
01-09-2013, 12:04 PM
very very thanks rajnish ji

ndhebar
01-09-2013, 11:35 PM
आपकी अभिव्यक्ति का अंदाज़ देखकर तो कोई भी आपके साथ चलने को तैयार हो जाएगा
बहुत सुन्दर प्रस्तुती

omprakashyadav
02-09-2013, 10:21 AM
thnaks Ndheber ji.......

Bansi Dhameja
11-10-2013, 09:37 AM
om prakash ji baut achhee rachna. mubarak ho.
जिसको चाहते हैं दिल की गहराई से
वो हमें हर हाल में सदा याद आते हैं
दूर हो के भी वो हमारे पास होते हैं
क्यों कि वो तो ह्मारे दिल में रहते हैं
बंसी(मधुर)