Re: अंग्रेजी क्यों रोना-धोना मचाती है ?
अब आइए, एक तीसरे आरोप का विश्लेषण करें, जिसमें एक हताश सिविल सर्वेंट को उद्धृत (कोट) करते हुए कहा गया है कि हिंदी डिवीजन के अधिकारी बस कार्यालयों के अधिकारियों और स्टाफ को हिंदी में पत्राचार करने, हिंदी में हस्ताक्षर करने और अहिंदी राज्यों में भी हिंदी में नाम-पट्ट (नेम-प्लेट) और साईनबोर्ड आदि लगाने जैसे कार्यों के लिए "परेशान" करते रहते हैं, जिसका कोई "मतलब (सेंस)" नहीं है! तो यहाँ स्पष्ट कर दूँ कि राजभाषा विभाग से जुड़े पदाधिकारी एवं कर्मचारी केवल वही कर रहे हैं, जो राजभाषा अधिनियम और राजभाषा नीति को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए उनसे अपेक्षित है. और जिन लोगों को उनके ऐसा करने में कोई मतलब (सेंस) नहीं दिखता, वे सीधे-सीधे संविधान द्वारा बनाए गए प्रावधानों की अवमानना कर रहे हैं. हाँ, यह नियमत: बाध्यकारी है कि सभी नाम-पट्ट, सूचना-पट्ट, साईनबोर्ड, मुहर इत्यादि हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषा में हों, जिसका क्रम अनिवार्यत: सबसे ऊपर/पहले स्थानीय भाषा, फिर/मध्य में हिंदी और सबसे नीचे/अंत में अंग्रेजी हो और सभी/तीनों भाषाओं के अक्षरों के आकार भी अनिवार्यत: एक समान हों.
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बेहतर सोच ही सफलता की बुनियाद होती है। सही सोच ही इंसान के काम व व्यवहार को भी नियत करती है।
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