आज जन्मदिन पर विशेष
चित्रों की प्रेरणा भारतीय संस्कृति से लेता हूं : एसएच रजा
करीब छह दशक का वक्त फ्रांस में गुजारने के बाद भी भारतीय संस्कृति को दिल में सहेज कर रखने वाले वरिष्ठ चित्रकार सैयद हैदर रजा का कहना है कि उन्हें भारतीय संस्कृति की विविधता से चित्र बनाने की प्रेरणा मिलती है। रजा ने जन्मदिन पर खास मुलाकात में कहा, ‘छह दशक का वक्त फ्रांस में गुजारने के बाद भी भारतीय नागरिक बना रहा। फ्रांस में भारतीय पासपोर्ट और वीजा के साथ समय गुजारा और अपने लोगों के बीच रहने की खुशी को बयां नहीं कर सकता।’ ज्यामिती के बिंदु और त्रिकोण के जरिए अपने भाव प्रकट करने वाले चित्रकार ने कहा, ‘विदेश में रहने के बावजूद दिल, दिमाग और आत्मा हमेशा भारतीय रही। भारतीय दर्शन के साथ हमेशा जुड़ा रहा और अपने कार्य के लिए भारतीय संस्कृति से विचार लेता हूं।’ एसएच रजा का जन्म 22 फरवरी 1922 को मध्य प्रदेश के मंडला जिले के बावरिया में हुआ था। यहां वह 12 साल की उम्र तक रहे। इसके बाद रजा ने दमोह के सरकारी विद्यालय में स्कूली शिक्षा पूरी की और जेजे स्कूल आफ आर्ट्स में अध्ययन किया। प्रगतिशील कलाकार समूह बनाने वाले कलाकार ने कहा कि शुजा और हुसैन जैसे चित्रकार अपना काम बेहद सादगी से करता थे, लेकिन कट्टरपंथियों के कारण एम. एफ. हुसैन को भारत के बाहर जाना पड़ा। कई चित्रकारों को निर्वासित जीवन बिताना पड़ा, लेकिन किसी ने कोई समझौता कभी नहीं किया। 91 वर्षीय रजा मानते हैं, ‘मेरा काम मेरे अंतर अनुभवों पर आधारित होता है और प्रकृति के रहस्यों के साथ जुड़ा होता है, जिसे रंग, रेखा, अंतरिक्ष और प्रकाश के जरिये दर्शाया जाता है।’ एक सवाल के जवाब में रजा ने कहा कि विभिन्न तरह के विवादों को सुनता हूं और देख रहा हूं कि लोग ‘न्यूड पेंटिग्स’ बना रहे हैं। यहां तक कि मेरी पेंटिग्स की कॉपी हो रही है। उन्होंने कहा कि पेंटिग्स खुद कुछ नहीं कहती, यह आर्टिस्ट का काम है कि वह अपने काम के बारे में लोगों को बताये और कई लोग ऐसा कर भी रहे है। चित्रों के बारे में उन्होंने कहा, ‘हरे, काले और लाल जैसे प्रमुख रंगों का इस्तेमाल करता हूं। ‘पुरूष और प्रकृति’ की अवधारणा स्त्री और पुरूष की शक्ति को दर्शाती है। बिंदु के विकिरण को विविध तरह से दर्शाया जा सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘कभी भी पब्लिसिटी का सहारा नहीं लिया, जो बेहद महत्वपूर्ण है। मैं इस उम्र में भी सुबह 10 या 11 बजे काम शुरू करता हूं और दोपहर में एक से डेढ़ बजे तक काम करता हूं। शाम को 4 बजे से 6 बजे तक काम करता हूं।’ रजा के स्टूडियों में एक बड़ी पेंटिग रखी थी, जिसमें ‘संसार को प्रणति’ लिखा था। इससे उनके मित्र अशोक बाजपेयी की बात याद आई कि रजा एकमात्र हिन्दी के चित्रकार है, उनका हिन्दी के साथ प्रेम उनके चित्रों में देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसे कल ही पूरा किया है। इसे भी रजा ने अपने चिर परिचित अंदाज बिंदु, खड़ी रेखा और त्रिभुज के संयोजन से बनाया है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन के इस दौर में लोग सिनेमा के बारे में अधिक जानते हैं, लेकिन सेवाग्राम, महात्मा गांधी, भक्ति और टैगोर के बारे में नहीं जानते। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय समकालीन कला को पूरी दुनिया में बेहद गंभीरता से लिया जाता है और इस वक्त कई आर्टिस्ट बेहतरीन काम कर रहे हैं।