My Hindi Forum

Go Back   My Hindi Forum > New India > Religious Forum

 
 
Thread Tools Display Modes
Prev Previous Post   Next Post Next
Old 06-01-2018, 06:56 PM   #1
soni pushpa
Diligent Member
 
Join Date: May 2014
Location: east africa
Posts: 1,271
Thanks: 1,402
Thanked 1,063 Times in 765 Posts
Rep Power: 58
soni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond repute
Default मकर संक्रांति

मेरे सभी पाठकों को और सभी हिंदुस्तानी भाई बहनो को आने वाली १४ जनवरी के दिन के मकर संक्रांति पर्व की अनेकानेक शुभकामनायें।



सामान्यतया आमजन को सूर्य की मकर संक्रांति का पता है, क्योंकि इस दिन दान-पुण्य किया जाता है। इसी दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं।
जैसे की हम सभी इस प्यारे से त्यौहार का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार किया करते हैं क्यूंकि इस दिन पतंग उड़ाने की मजा हर कोई लेना चाहता है खास करके गुजरात में इस त्यौहार पर पतंगबाज़ी बहुत होती है लोग
अपने घरों की छतों में जाकर पतंग उड़ाने का मजा लेते हैं
किन्तु इस पर्व की इस मजा में एक दुःख की बात ये भी हो जाती है की नुकीले धागों की वजह से निर्दोष पक्षी मारे जाते हैं। . इसलिए न चाहते हुए भी पुण्य की जगह हम पाप कर बैठते हैं , जबकि इस दिन को पुण्य कमाने का दिन भी माना जाता है इस दिन ज्योतिषों का कहना है की दान का बहुत महत्व होता है दान करके बड़ा पुण्य कमाया जा सकता है। इस दिन को महाराष्ट्र में भी बेहद ख़ुशी के साथ मनाया जाता है वहां महिलाएं एकदूजे के माथे पर हल्दी कुमकुम लगाकर उन्हें भेंट देती हैं इससे ऐसा माना जाता है की ऐसा करने से उनके सौभाग्य में अभिवृद्धि होती है।

इस दिन बहन बेटियों को विशेष रूप आदर सम्मान सहित घरपर बुलाकर उन्हें भी दान दिया जाता है। वैसे उत्तरायण की गरिमा का ज्ञान श्रीकृष्ण भगवन ने गीता में भी दिया है जो कुछ इस प्रकार से है,,

श्रीकृष्ण ने कहा था- भगवान श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायण का महत्व बताते हुए गीता में कहा है कि उत्तरायण के छह मास के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है तो इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता, ऐसे लोग ब्रह्म को प्राप्त हैं।

इसके विपरीत सूर्य के दक्षिणायण होने पर पृथ्वी अंधकारमय होती है और इस अंधकार में शरीर त्याग करने पर पुनः जन्म लेना पड़ता है।
soni pushpa is offline   Reply With Quote
 

Bookmarks

Tags
मकर संक्रांति, makar sankranti

Thread Tools
Display Modes

Posting Rules
You may not post new threads
You may not post replies
You may not post attachments
You may not edit your posts

BB code is On
Smilies are On
[IMG] code is On
HTML code is Off



All times are GMT +5.5. The time now is 10:27 AM.


Powered by: vBulletin
Copyright ©2000 - 2018, Jelsoft Enterprises Ltd.
MyHindiForum.com is not responsible for the views and opinion of the posters. The posters and only posters shall be liable for any copyright infringement.