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Old 08-09-2016, 01:54 PM   #21
VARSHNEY.009
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Default Re: उपन्यास

पुलिसवाले हथियारों को थामें कतार में तेजी से भीतर प्रवेश करते चले गए । जैम डिमोरा, अज्जू मोरेकर और ओमी खुराम का दिल जोरों से धडक रहा था ।



राने ग्रोवर भी असंयत-सा था, पंरन्तु ठीक काम कर रहा था ।


भीतर जाने वाले करीब पचीस थे ।



वे चारों गली में आए और तेजी एक तरफ बढने लगे ।



अभी भी गली में चार-पांच पुलिसवाले पहरे के तौर पर तैनात थे । लेकिन इस आधे अंधेरे में वो वर्दी की वजह से इन्हें भी पुलिसवाले समझ रहे थे । यही कारण था कि वो सुरक्षित रहे ।


गली से बाहर आ पहुचे ।


हर तरफ़ पुलिस-ही पुलिस दिख रही थी ।


वे चारों एक तरफ , चले गए और कुछ ही देर में वहाँ से दूर हो गए ।

आधी रात के दो बज रहे थे ।



जैम डिमोरा, औमी खुराम, अज्जू मोरेकर और कराने ग्रोवर हागकांग के वेस्ट हिस्से में आठ मंजिला अपार्टमेंट के एक फ्लैट में मोजूद थे । ये फ्लैट अज्जू मोरेकर का था और किसी को इसका पता नहीं था । जरूरत का सारा सामान पलेट पर मौजूद था । खाने-पीने का सामान कम था परंतु काम चल रहा था ।


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Old 08-09-2016, 01:54 PM   #22
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Default Re: उपन्यास

ओमी खुराम की बनाई कॉफी तीनों पी रहे थे ।


खाने में बिस्कुट, पेटीज और बर्गर ।



सब चुप-चुप से थे । उनके चेहरों पर गम्भीरता नजर आ रही थी । पुलिस के कपड़े वे उतारकर, फ्लेट में रखे अज्जू मोरेकर के कपड़े पहने हुए थे ।



जैम डिमोरा के हाथ में व्हिस्की का गिलास था और सोच भरे अंदाज में रह-रहकर घूंट भर लेता था ।



"राने ।" जैम डिमोरा ने कहा-----" तेरी समझदारी की वजह से निकल आए वहां से ।"


राने ग्रोवर खामोश रहा ।

"तुने पहले ही इस वक्त के लिए इंतजाम कर रखा था । पैनी नजर रखता है तू हमेशा ।" डिमोरा ने फिर कहा ।



राने ने कुछ नहीं कहा, पर ओमी खुराम कह उठा ।


"ये सब कब तक चलेगा डिमोरा साहब ।"



"खतरा वहुत बढ़ गया है ।" जैम डिमोरा कह उठा ।



"कई महीनों से हम ठीक से धंधा नहीं कर पा रहे है और अब जान भी खतरे में दिख रही है ।"अज्जू मोरेकर ने कहा ।



" मैकस फेरी अब हाथ धोकर अपके पीछे पड़ गया है । वो रुकने वाला नहीं ।" ओमी खुराम कठोर स्वर में बोला…
मेरा तो मानना है कि मैकस तो खत्म कर देना चाहिए । जब से ये पुलिस चीफ़ बना है, हमें परेशान कर रहा है ।"


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Old 08-09-2016, 01:54 PM   #23
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Default Re: उपन्यास

"पुलिस चीफ़ की हत्या हम सारे हांगकांग की पुलिस को अपना दुश्मन वना लेगे ।" जैम डिमोरा ने घूंट भरकर कहा गलती भूल कर भी मत करना । कभी…कभी कदम पीछे भी हटाने पड़ते है । हमें मैक्स को नहीं मारना है ।"


" तो फिर क्या करें ? धंधा नहीं कर पा रहे । चूहों की तरह भागना पड़ रहा ।"



"इस बात पर मैं गम्भीरता से सोचूंगा कि अब मुझे क्या करना चाहिए । मेरे खयाल में ऐसी स्थिति में हम न तो हांगकांग में रह सकते है न ही यहाँ काम कर सकते हैं ।" जैम डिमोरा गम्भीर था…"हमें हांगकांग से निकल जाना होगा ।'"


"आप गम्भीर है इस बात पर?"


"अभी ये सब बाते सोच रहा हू। पुलिस से हम झगड़ा नहीं ले सकते । उसकी बराबरी नहीं कर सकते । हांगकांग में रहे तो एक दिन जल्दी ही पुलिस हमे मार देगी ।" जैम डिमोरा बोला…"मरने से तो अच्छा है कि हम हांगकांग छोड़ दे ।" डिमोरा ने सबको देखा ।


ओमी खुराम, राने ग्रोवर और अज्जू मोरेकर की नजरे मिली ।


" ये बात तो सच है कि हम पुलिस की बराबरी नहीं कर सकते ।" राने ग्रोवर बोला ।


"लेकिन एक नए देश में जाकर बसना और वहाँ धंधा शुरू करना, ये काम काकी कठिन होगा ।" अज्जू मोरेकर ने कहा ।


"ये करना ही पड़ेगा ।" जैम डिमोरा बोला ।


"किस देश में जाने की सोचा है आपने?" ओमी खुराम ने पूछा ।


"सोचा नहीं । अब मैं इस तरफ गम्भीरता से सोच लूगा । कल सुबह से तुम लोगों को एक काम करना है ।"


"आप हुक्म करें?"


" मौरिस को दूंद्रो ।" जैम डिमोरा की आंखो में दरिंदगी नाच उठी-" मुझे गद्दार मौरिस चाहिए ।"
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Old 08-09-2016, 01:55 PM   #24
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Default Re: उपन्यास

अगले दिन ग्यारह बजे जैम डिमोरा की नीद तव टूठी जव मोबाइल फोन बजने लगा था । डिमोरा ने फोन पर बात की । दूसरी तरफ़ मैगी थी जो कि चिंतित लग रही थी ।


"मैंने टी.वी. में सुना कि रात आप पुलिस के हाथो से बच निकले ।" मैगी का स्वर तेज था ।



"हाँ !" जैम डिमोरा बोला ।


"आप इतने खतरे में क्यों रह रहे हैं पापा । आप हांगकांग छोड़ दीजिए । पुलिस अपकी जान ले लेगी ।"



"मैं इस वात पर गम्भीरता से विचार कर रहा. . . ।"



"अभी तक आप विचार कर रहे हैं, मैंने तो सोचा था कि आपने फैसला ले लिया होगा ।"


"मुझे एक दो दिन का वक्त दो । नए देश में जाकर बसना आसान नहीं । तुम बताओं कि कहां जाऊं?"



"जहां भी आपका मन हो । जहां आपकी पहचान का कोई खास हो ।" उधर से मेरी ने कहा ।



मैं सोचता हूं कि हिंदुस्तान चला जाऊं ।"



"इंडिया? "


"सोच रहा हूं। वहीं मैं पैदा हुआ था, छोटा ही था जब हांगकांग आ... ।"

" इंडिया में आपकी पहचान का कोई है?"



हां, विनय बरूटा है । वो मेरा अच्छा दोस्त है ।"


"क्या करता है?"


"डकैतियाँ करता है । काबिल इंसान है । वे जरूर मेरी हैल्प करेगा । मैं कई वार हंडिया जाकर, उसके पास रुका हूं । वहां पर वो मेरे पैर जमाने में मेरी सहायता भी करेगा । वो बढिया बंदा ।" जैम डिमोरा ने सोच भरे स्वर में कहा ।

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Old 08-09-2016, 01:55 PM   #25
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Default Re: उपन्यास

"ये फैसला तो आपने ही लेना है कि आपने किस देश में जाना है पापा और किसकी सहायता लेनी है ।"



"सही कहा, ये मैं देख लूंगा ।"



"इस वक्त आप कहां हैं?




" सुरक्षित जगह पर ।"



"मेरे वॉल्ट से ज्यादा सुरक्षित जगह दूसरी नहीं । आप मेरे पास जा जाइए पापा ।"



"मैं बिल्कुल ठीक हू बेटी , तुम मेरी ज्यादा चिंता मत करो ।"


" पुलिस की वजह से परेशान हू कि . . . ।"


"' एक आदमी गद्दारी कर गया था तभी पुलिस वहाँ आ गई थी । लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं होगा । मेरे पास अव आदमी नहीं । सिर्फ मेरे खास लोग ही हैं । यहां सब ठीक रहेगा ।" जैम डिमोरा ने गम्भीर स्वर में कहा ।

"मुझे आपकी चिंता है ।"



"जानता हुं । लेकिन मैं सव सम्भाल लूंगा । हालात मेरे काबू में है ।"



"वादा पापा कि आप जल्द-से-जल्द हांगकांग छोड़ देंगे ।"


"वादा ।"


मैगी से बात करने के बाद जैम डिमोरा उठा और पूरा फ्लैट चैक किया । फ्लैट में कोई नहीं था और दरवाजा लॉक्ड था । ओमी, राने, अज्जू फ्लैट पर नहीं थे । जैम डिमोरा ने किचन में जाकर सामान ढूंढा और ब्लैक कॉफी तैयार करके, प्याले में डालकर ड्राइंगरूम में कुर्सी पर आ बैठा। कांफी के घूंट भरता बीती रात के हालातों पर गौर करने लगा ।

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Old 08-09-2016, 01:55 PM   #26
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Default Re: उपन्यास

ये रात आखिरी रात होनी थी अगर रांने ने ऐसे खतरे के बारे में पहले ही प्लान न कर रखा होता । पुलिस भारी संख्या में वहां मोजूद थी और राने सबको वहां से बचाकर ले गया ।


डिमोरा को ऐसे हालातों की आदत नहीं थी । वो नहीं चाहता था फिर कभी ऐसे हालात आएं । हांगकांग पुलिस उसके पीछे थी तो वो अपना काम पूरा करके ही रूकेगी ।


जैम डिमोरा समझ चुका था कि उसे हांगकांग छोड़ना ही होगा नहीं तो जिंदा नहीं रहेगा । रात वाले ठिकाने पर उसके आठ विश्वासी आदमी थे । परंतु तीन ही वहां से निकल सके । बाकी के खास पांच लोगों का उसे दुख था । उनके पकड़े जाने के चांसिस कम और मारे जाने के चांसिस ज्यादा थे ।



कांफी खत्म कर लेने के बाद भी डिमोरा कुछ देर तक कुर्सी पर बैठा सोचता रहा। ये फैसला तो वो ले ही चुका था कि उसे हांगकांग से निकल जाना होगा । परंतु कहाँ जाए, ये फैसला लेना था । हिंदुस्तान में वो पैदा हुआ था । वहाँ भी जा सकता था और पाकिस्तान में भी उसकी पहचान बहुत थी ।

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Old 08-09-2016, 01:55 PM   #27
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Default Re: उपन्यास

इसके अलावा युरोप की कई जगहें थी जहाँ वो बस सकता था । डिमोरा ने अपनी दौलत के बारे में सोचा जो कि मैगी के वॉल्ट में सुरक्षित थी । उसकी उसे चिंता नहीं थी ।


अपने हीरे-जवाहरार्तों के संग्रह को जरूर अपने साथ ले जाएगा । बेशकिमती दुर्लभ हीरे-जबाहरात का डिमोरा शैदाई था ।


उसके पास दुनिया भर के कितने बेशकीमती हीरे-ज़वाहरात थे जो कि दुर्लभ की श्रेणी में आते थे ।


अपनी दौलत का काफी बड़ा हिस्सा उसने दुर्लभ हीरे-जवाहरातों को खरीदने में लगा दिया था साथ ही इन्हें इकट्ठा करने में वक्त भी बहुत लगा था ।


जैम डिमोरा ने फैसला किया कि जिस देश भी जाएगा, अपने हीरे-जवाहरातों को ज़रूर अपने साथ ले जाएगा । इन्हें देखते रहना, डिमोरा को अच्छा लगता था । अब भी वो यदा-कदा मैगी के वॉल्ट में जाता और वहां रखे अपने बेशकीमती, दुर्लभ हीरे-जवाहरातो के संग्रह को देखकर मंत्र…मुग्ध-सा घंटों…घंटों निहारता रहता ।

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Old 08-09-2016, 01:56 PM   #28
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तभी मोबाइल बज उठा ।

जैम डिमोरा के विचार रुके और फोन उठाकर नम्बर देखा। दूसरो तरफ ओमी खुराम था ।


"कहो ।" डिमोरा ने बात की ।



"रात सेम दो लोगों के साथ बच निकला है ।" ओमी खुराम की आबाज कानों में पडी ।



"ये तो अच्छी खबर है ।
डिमोरा के चेहरे पर राहत के भाव उभरे ।


"आपका नम्बर नहीं लग रहा था तो उसने मुझे फोन किया. . . ।"



"सैम से कहो कि उन दोनों के साथ अंडरग्राउंड हो जाए। जब तक मेरा फोन न आए खुले में न निकले ।"



जी डिमोरा साहब ।"



हमारे कितने आदमियों को पुलिस ने मारा?" डिमोरा ने पूछा ।


"बारह से ऊपर तो फायरिंग में मारे गए। पुलिस ने आपका खाना बनाने वाले को भी शूट कर दिया ।"



"बहुत गलत कर रही है पुलिस । मेरे काफी लोग मारे गए । मौरिस मिला?"



"हम उसे ही दूंढ़ रहे हैं ।"



"सावधानी से । पुलिस की नजरों में मत आ जाना । सेम से कहना मत भूलना कि अंडरग्राउंड हो जाए ।" इसके साथ ही जैम डिमोरा ने फोन बंद करके एक तरफ़ रखा और नहाने के लिए बाथरूम में चला गया ।


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Old 08-09-2016, 01:56 PM   #29
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आधे घंटे बाद बाथरूम से निकला और वो ही उतारे कपड़े पहन लिए । चहेरे पर गहरी सोच के भाव नजर आ रहे थे । लगता था जैसे वो किसी फैसले पर पहुचने की चेष्टा कर रहा हो ।


उसके बाद फ्रिज खोलकर नाश्ते का सामान दूढ़ने लगा तो उसे दो जोडी सैंडविच मिल गए । उन्हें खाने के बाद कॉफी बनाई । कॉफी का घूंट भरते मोबाइल उठाया और फोन में से निकालकर एक नम्बर मिलाया फोन कान से लगा लिया ।



दूसरी तरफ तीन-चार बार वेल गई फिर विनय बरूटा की आवाज आई ।



" कैसे हो मेरे दोस्त डिमोरा ।" स्वर में खुशी के भाव थे ।



मे"तुम सुनाओ हिंदुस्तान का मौसम कैसा है?" जैम डिमोरा ने शांत स्वर पूछा ।



"यहां सब ठीक रहता है । यहां की हवा वहुत अच्छी है । काम में दिल लगा रहता है । आ जाओ इंडिया ।"



कुछ चुप रहकर जैम डिमोरा ने फोन पर कहा ।


"यहां का मौसम ठीक नहीं चल रहा ।"


" मतलव ? "


"पुलिस हांगकांग से अंडरवर्ल्ड को खत्म करने पर लगी है । जडें उखाड़ रही है ! दो साल से ये सब चल रहा है , परन्तु तब मुझे कोई फर्क नही पड रहा था लेकिन अब पुलिस ने नजरें मुझ पर टिका दी है !"

"बुरी खबर है ये तो दोस्त ।" उधर से विनय बरूटा ने कहा ।



"रात पुलिस ने मुझे घेर लिया था । लेकिन अपने आदमी की वजह से बच निकला ।" जैम डिमोरा बोला ।



"तो नौबत यहां तक आ गई है ।"



"पुलिस के डर से अपने लोगों ने गद्दारी करनी शुरू कर दी है । अब हांगकांग में नहीं रहा जा सकता ।"



"धंधा भी बंद होगा?"



दो महीने से पूरी तरह बंद है । पुलिस जान के पीछे पडी है । मेरे लोग भी बिखरते जा रहे है ।"



विनय बरूटा की तरफ़ से चुप्पी रही ।



" मै ये फैसला कर रहा हू किस देश में जाकर रहू? तुम क्या राय देते हो !"



"डिमोरा तुम मेरे दोस्त हो । मुझे तुम्हारी चिंता है । मेरी राय मांगते हो तो मैं ये ही कहूंगा कि इन हांगकांग को फौरन छोड़ दो । मेरे पास इंडिया आ जाओ । शायद बाद में सव ठीक हो जाए ।"



"कुछ ठीक नहीं होने वाला है पुलिस बुरा व्यवहार कर रही है । नोट लेने को भी तैयार नहीं । इस उम्र में कभी इस देश, तो कभी उस देश भागू ये ठीक नहीं होगा । मुझे एक जगह टिक जाना होगा ।"



ये बात हैतो तुम्हारे लिए इंडिया से बढिया जगह कोई दूसरा देश नहीं हो सकता ।"



"मैं भी ये ही सोचता हूं। तुम जैसा मेरा दोस्त हिंदुस्तान में है तो मुझे ज्यादा चिंता नहीं करनी पडेगी ।"



" जरा भी फिक्र मत करो । मैं हर कदम पर तुम्हारे साथ हूं डिमोरा । तुम आओ तो. . . ।"



"हिंदुस्तान में मैंने कई जगह प्रापर्टी ले रखी है । वो सब मेरे काम आ जाएगी । और जगहें भी खरीदनी होगी । तुम मेरा साथ दोगे तो सब कुछ आसान हो जाएगा ।" डिमोरा गम्भीर स्वर में बोला ।



"तुम कहों तो ।" विनय बरूटा की आवाज आई…
मैं तुम्हारे लिए क्या कंरू?"



"अपने शहर मुम्बई में मेरे लिए बढिया बंगले और मौके की जगहो को खरीदो । दो दिन में तुम्हारे पास पैसा पहुच जाएगा । इधर मैं आने की तैयारी करता. . . ।"

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Old 08-09-2016, 01:57 PM   #30
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Default Re: उपन्यास

तैयारी क्या करनी है, आ जाओ । तुम्हारे लिए हांगकांग के हालात खतरनाक है ।"
"तैयारी करनी होगी मुझें । मैं अपने हीरे-ज़वाहरातो के संग्रह को भी हिंदुस्तान लाना चाहता हूं । जैसे मां अपने बच्चे को नहीं छोड़ सकती, उसी तरह मैं अपने दुर्लभ हीरे-जवाहरातों को अपने से दूर नहीं रख सकता ।" डिमोरा ने कहा ।



फिक्र मत करो दोस्ता मैं हर तरह से तुम्हारे साथ हूं। तुम्हारा कहा हर काम मैं पूरा करूंगा ।"



" मै जानता हू तुम मेरे सच्चे दोस्त हो । । हिंदुस्तान के कामों को तुमने ही सम्भालना है । मेरा जो भी प्रोग्राम होगा, तुम्हें बताता रहूगा । यहां मैं अपनी तैयारी शुरू करता हू।" जैम डिमोरा गम्भीर था ।



"मुझे खुशी है कि तुम हिंदुस्तान में, मुम्बई में बसने जा रहे हो । यहां की हर चीज तुम्हें अच्छी लगेगी ।"



"मेरे लिए वहीं जगह देखो । परसों पैसा तुम्हारे पास पहुच रहा है ।"




जैम डिमोरा ने फोन बंद किया और अपना फोन पुलिस चीफ मैकस फेरी को किया । बात हो गई । पैकस फेरी की आवाज डिमोरा के कानों में पडी तो डिमोरा ने शांत स्वर में कहा ।


"तुमसे बात करके से हमेशा बहुत खुशी मिलती है ।"


थोड्री-सी खामोशी वाद पैकस फेरी की आवाज़ कानों में पडी ।


"परंतु ड्रग्स र्किग जैम डिमोरा से बात करके मुझे खुशी नहीं मिलती ।"



"तुम जाने क्यों मुझसे बहुत नाराज हो ।"



" मेरी डूयूटी मुझें इस बात का एहसास दिलाती है कि तुम अभी तक सही-सलामत हो ।"


तुम कहीं व्यक्तिगत दुश्मनी तो नहीं उतार रहे मुझसे?"


"व्यक्तिगत रूप से मैं तुम्हें नहीं जानता। कभी तुमसे मिला भी नहीं । रात पुलिस की वर्दी की आड़ में बच निकले ।"



"मेरी किस्मत अच्छी थी ।"


"हर बार ऐसा नहीं होगा ।"



"जानता हूं। पुलिस के साथ ये खेल ज्यादा लम्बा नहीं चलेगा। मुझें इसी बात की चिंता है ।"

"तो तुमने फैसला कर लिया कि अपने को कानून के हवाले करोगे ।" मैकस फैरी का गम्भीर स्वर कानों में पड़ा ।


"ये बात तो मैं कभी सोच भी नहीं सकता पुलिस चीफ साहब ।"



"रात तुम्हारे आदमियों की फायरिंग में एक पुलिसवाला मारा गया और चार घायल. . . ।"


"दुख है मुझे । गलती तुम्हारी ही थी जो तुम मुझे पकड़ने आ गए । इतना आसान नहीं है मुझे पकड़ना । लेकिन मैं पुलिस के हाथों मरना भी नहीं चाहता है मैं चाहता हू तुम मेरे बारे में भी कुछ सोचो ।"

"तुम्हारे बारे में ही सोच रहा इन दिनों ।" मैकस फेरी का स्वर कड़वा हो गया------------" सोचता हूं तुम जब मेरे सामने आओगे तो तुम्हें कैसे मारु? तड़पा-तड़पाकर मारूं या सीधे तुम्हारे सिर में गोलियां मार दू।"

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