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Old 08-09-2016, 03:11 PM   #81
VARSHNEY.009
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पावडे मुझे मारने जा रहा था ।"



"वो इसकी गलती थी । इसे समझ आ गया है कि इसे ऐसा नहीं करना चाहिए !" रघु ने कहा ।



" मुझे अभी भी विश्वास नहीं होरहा कि... ।"



तभी पावड़े ने रिवॉल्वर वाला हाथ उठाया और फाॅयर कर दिया ।

गोली नीचे पड़े राने की छाती में जा लगी । राने कुछ तड़पा फिर शात पड गया ।



पावड़े ने रिवॉल्वर जेब में रखी और तीखे स्वर में सोहनलाल से कहा ।



"जाते वक्त तुझे बेहोश कर जाएंगे । घंटे-डेढ़ में तेरे को होश आएगा तो निकल लेना यहां से ।"

मुझें बेहोश करने की क्या जरूरत है ।" सोहनलाल ने तेज स्वर में कहा ।



"जरुरत है । ताकि मुझे छिप जाने का पर्याप्त वक्त मिल सके ।"



"इन बैगों में है क्या है ?" रघु ने फिर पूछा ।



" तेरे दस करोड़ ।" पावड़े ने कहा-----" यहां से निकलने की तैयारी कर हाथ लगा । तीनों सूटकेस शो-केस तक ले चलते हैं फिर वहां से बाहर खडी वेन में । चार बजकर बीस मिनट हो रहे है । कुछ ही देर में दिन निकल आएगा ।"



फिर पावड़े और रघु ने मिलकर सूटकेसों को शो-केस की विंडो तक पहुँचाया, जहां से वो लोग भीतर आए । सूटकेस काफी भारी थे और रघु ये ही सोचने की चेष्टा में था कि आखिर भीतर है क्या?"




"तू यहीं रुक ।" पावड़े बोला-----
मैं सोहनलाल को बेहोश करके आया ।" कहकर पावड़े भीतर की तरफ चला गया ।



सोहनलाल कमरे में खड़ा था ।



पावड़े के भीतर आते ही निगाह उस पर जा टिकी ।



पावड़े के चेहरे पर कडवी मुस्कान उभरी ।



सोहनलाल ने आंखें सिकोड़केर, पावड़े को देखा ।



"अलविदा सोहनलाल । हमारा साथ यहीं तक था ।" कहने के साथ पावड़े ने जेब से साइलेंसर लगी पिस्टल निकाल ली ।

"तू मुझें मारेगा ?" सोहनलाल के दांत भींच गए ।




"मजबूरी है, तेरा जिंदा रहना. . . ।"



"गलत बात पावड़े ।" दरवाजे की तरफ से रधु की आवाज आई----" तूने मेरे से वादा किया है कि सोहनलाल की जान नहीं लेगा ।"




पावड़े गर्दन घुमाकर रघु की तरफ देखा । दरवाजे के बीचोबीच खड़े रघु के हाथ में राने वाली रिवॉल्वर दबी थी ।




सोहनलाल एकाएक सतर्क हो उठा कि अब कुछ भी हो सकता है ।



"मैं मजाक कर रहा था ।" पावड़े ने फौरन खुद को सम्भाला-----" मैं तो इसे बेहोश करने वाला था ।"




" तो कर ! पर एक बात मेरे दिमाग में है कि सोहनलाल के हिस्से का क्या होगा!" रघु ने पूछा ।



ये लेना नहीं चाहता ।" पावड़े बोला ।


"पवका?"



" पूछ ले ।" पावड़े ने सोहनलाल को देखा ।




"ये ठीक कहता है ।" सोहनलाल, पावड़े को घूरते बोला-----" मुझे एक पैसा भी नहीं चाहिए इस काम से ।"




पावड़े सोहनलाल की तरफ बढा, पिस्टल को साइलेंसर वाले हिस्से की तरफ से पकड़ा ।




"सिर्फ बेहोश करना ।" रघु बोला-----"सिर मत खोल देना ।"



पावड़े ने पीछे से सोहनलाल की कनपटी पर चोट की तो सोहनलाल की आंखो के सामने अंधेरा नाच उठा ।



उसने खुद को सम्भालने की चेष्टा की, परंतु दूसरी चोट ने उसे बेहोशी में पहुचा दिया । वो नीचे जा गिरा ।


"बढिया ।" रघु बोला-----"चल निकल चलते हैं ।"


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Old 08-09-2016, 03:12 PM   #82
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दोनों कमरे से बाहर निकले और शो-केस की तरफ़ बढते चले गए ।



वहां पर तिजोरी पडी थी ।


राने ग्रोवर की लाश पडी थी और सोहनलाल का शरीर पडा था ।



कमरे के दरवाजे के बाहर अज्जू मोरेकर का बेहोश शरीर पड़ा था । आसपास खून बिखरा था । गिरते वक्त उसका सिर फर्श से टकराया था जिसकी वजह से वो उसी पल बेहोश हो गया था ।



जबकि पावडे-----रघु ने समझा कि वो मर गया है । अगर बो बेहोश न हुआ होता तो रघु दूसरा वार करके उसे जरुर मार देता ।


कमरे और उसके बाहर खामोशी को कठिनता से दो मिनट ही बीते होंगे कि एकाएक अज्जू मोरेकर को होश आने लगा ।



उसके होंठों से पीड़ा भरी कराह निकली । शरीर कापां फिर हिलने लगा ।


कुछ पलों बाद आंखें खुलीं तो पेट में पीड़ा की तीव्र लहर उठी । हाथ पेट तक पहुंचा तो अहसास हुआ कि वहां खून है ।



उसे ध्यान आया कि जब वो बाहर का फेरा लगाने कमरे से बाहर निकला तो किसी ने उस पर चाकू से वार कर दिया । वो पीछे को जा गिरा, तब उसका सिर फर्श से टकराया और होश गवां बैठा ।



सिर के पीछे के हिस्से में भी पीड़ा का एहसास हुआ था । उसने करवट ली तो कमरे से बाहर आती रोशनी में खुद को खून मे डूबे पाया ।




अज्जू मोरेकर ने कमरे के खुले दरवाजे की तरफ देखा । भीतर की रोशनी में उसने फ़र्श पर पडी टांगे देखी । कोई फर्श पर पड़ा था ।


_______________

डकैती का जादूगर 93-94
________________



पता नहीं वो कितनी देर बेहोश रहा। उसकी बेहोशी के दोरान क्या हुआ ।



"र. ..राने ।" अज्जू मोरेकर ने अपनी कमजोर, थकी आवाज में आवाज लगाई । परंतु जवाब में कोई आवाज, आहट न आई ।


अज्जू मोरेकर ने कुछ गहरी सांसे लेने के वाद पुन: आवाज लगाई ।



"राने, तू कहां है!" लेकिन खामोशी ही ठहरी रही ।


अज्जू मोरेकर कई पलों तक कमरे में दिख रही टांगों को देखता रहा।



ये ही सोचता रहा कि राने शायद जिंदा नहीं रहा । वो कमजोरी महसूस कर रहा था ।



खून काफी बह गया था । एक हाथ पेट के जख्म पर था । दूसरे हाथ से जेब में से मोबाइल निकाला और ओमी खुराम के नम्बर मिलाकर फोन कान से लगा लिया ।



दूसरे ही पल उधर बेल जाने लगी ।



लम्बी बेल जाने के बाद ओमी खुराम का नीद से भरा स्वर कानों में पड़ा।




"ये कोई वक्त है अज्जू फोन करने का ।"



" ओमी ।" अज्जू मोरेकर का स्वर टूटने लगा था'-----" यहाँ गडबड है !"




" क्या ?" उधर से ओमी खुराम एकाएक सतर्क हो उठा ।



"जल्दी से यहां आ-जा ।"



"हुआ क्या?"



" पता नहीं । मैं घायल हूं। राने शायद नहीं रहा । यहां पर कोई था । मुझे डाक्टर की जरूरत है ।"



"हम अभी आ रहे हैं ।" इसके साथ ही ओमी खुराम ने उधर से फोन बंद कर दिया था ।



अज्जू मोरेकर ने फोन पास ही में रखा और आंखें बंद करके गहरी सांसे लेने लगा ।

शोभा नारायण दास बुटीक में ओमी खुराम, अन्य पांच साथियों के साथ पहुचा तो सुबह के साढे पांच बज थे । दिन निकल आया था।

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Old 08-09-2016, 03:12 PM   #83
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सड़क पर से ट्रैफ़िक निकल रहा था । बुटीक में सन्नाटा छाया हुआ था। अज्जू मोरेकर को बेहोश पाया ।


कमरे मे उन्हें राने ग्रोवर की लाश मिली और सोहनलाल बेहोश मिला । तिजोरी खुली पडी थी और खाली थी ।



ये सब बातें उन लोगों को झटका देने के लिए काफी थी ।



अज्जू मोरेकर को दो लोग तुरंत उठाकर, गाड्री में डालकर डॉक्टर के पास ले गए ।



राने ग्रोवर को मृत देखकर ओमी खुराम को काफी तकलीफ हुई । वो सालों से इकटूठे काम कर रहे थे । बेहोश पड़े सोहनलाल को ध्यान से देखा और पाया कि इस आदमी को उसने पहले कभी नहीं देखा है ।



एक आदमी तिजोरी के खुले दरवाजे के पास पहुंचा और होल में फंसे हैंडिल को देखा ।



"किसी ने तिजोरी खोल ली ।" पास आता सैम नाम के आदमी से कह उठा ।




'हैरानी है । कम्पनी तो कहती थी कि इस तिजोरी को कोई नहीं खोल सकता ।"




"तिजोरी का हैडिल बना लिया गया । ये काम कोई एक्सपर्ट ही कर सकता है ।
सेम बोला--------"लेकिन ये काम एक ही वार में नहीं हो सकता । इसके लिए काकी वक्त लगा होगा कि हैंडिल को होल में लगाकर बार-बार चैक किया जा सके ।"



"किसी को पता कैसे लगा कि यहाँ तिजोरी है, भीतर दौलत है ।" पास आता तीसरा आदमी कह उठा ।



" इन बातों का जवाब हमारे पास नहीं है ।" सेम ने बेहोश सोहनलाल पर निगाह मारी-----------" बो बताएगा ।"

"उसे बेहोश करके यहां छोडा गया है । मैंने उसकी कनपटी पर चोट का निशान देखा है ।"


"वो दौलत ले जाने बातों का साथी है ।"



सैम, ओमी खुराम के पास पहुचा, जो कि राने की लाश के पास मौजूद था।



"राने की मौत का अफसोस है । तुम लोग इकट्ठे काम करते थे ।" सैम ने कहा ।




"राने सही था ।" ओमी खुराम ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा--------" मैं ही उसे समझ न सका । वो कहता रहा कि हमारे जाने के बाद यहां कोई आता है, परंतु मैने उसकी बात को मात्र उसका वहम समझा। लेकिन ये सहीं कहता था ।"



"हमे आगे का काम देखना है ।" सैम बोला ।



"अज्जू बच जाएगा क्या?"



" कह नहीं सकता ।" सैम ने कंधे उचकाए…"हालत खराब ही लग रही थी ।"



"मैं उन लोगों को नहीं छोडूंगा जिन्होंने ये सब किया है ।" ओमी खुराम गुर्रा उठा ।



"ये तुम्हारा व्यक्तिगत मामला नहीं है । इसमें जैम डिमोरा की बहुत बडी दोलत भी चली गई है । जैम डिमोरा ही फैसला लेगा कि क्या करना ।"


ओमी खुराम ने खुद को सम्भाला ।




" राने ने जैम डिमोरा से कहा था कि उसे शक है, यहां कोई आता है, इसलिए वो तिजोरी के पास रहना चाहता है । जैम डिमोरा ने हां कह दी ।" सेम ने गम्भीर स्वर में कहा------"परंतु राने और अज्जू यहां के हालातों को सम्भाल नहीं सके ।"



"क्या पता यहां क्या हुआ होगा ।"



जो भी हुआ हो, हालातों को सम्भाल नहीं सके । राने की लाश सामने है और अज्जू पता नहीं वच पाता है कि नहीं । हमे अभी जैम डिमोरा को फोन करके सारे हालात बताने होंगे और अगला आदेश लेना होगा ।" सेम बोला ।


" जैम डिमोरा को ये सुनना अच्छा नहीं लगेगा कि उसकी दौलत चली गई । राने मर गया और अज्जू मोरेकर मौत के करीब है ।"


" बताना है उसे अभी ।"



"तुम ही बताओं ।" ओमी खुराम गम्भीर स्वर में बोला ।



सेम ने हर तरफ नजर मारी फिर फोन निकालकर कमरे मैं एक तरफ चला गया ।

सैम पांच मिनट जैम डिमोरा से फोन पर बात करता रहा । ओमी खुराम राने ग्रोवर के लाश के पास ही टहल रहा था । स्पष्ट था कि राने की मौत का उसे बहुत दुख हो रहा था ।




अन्य चार तिजोरी के पास खड़े बातो में व्यस्त थे । यहां का माहौल गम्भीरता से भरा था इस वक्त ।



सैम फोन बंद करके ओमी खुराम के पास आता कह उठा ।



" जैम डिमोरा कहता है कि चिंता की कोई बात नहीं, हम उन लोगों को तलाश का लेंगे जो दौलत ले गए हैं । उसका कहना है कि जब तक वो नहीं हिंदुस्तान पहुंचता, तब तक मामले को विनय बरूटा सम्भालेगा ।"




"विनय बरूटा ?" ओमी खुराम ने सैम को देखा ।



"फोन करो उसे । विनय वरूटा का नम्बर तुम्हारे पास है । क्या तुम उसे जानते हो?"



"पंद्रह दिन पहले इसी काम के सिलसिले में उससे एक बार मिला था । जैम डिमोरा कव आएगा इंडिया?"



" परसों के इंडिया पहुच जाएगा ।"

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Old 08-09-2016, 03:12 PM   #84
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ओमी खुराम ने विनय बरुटा को फोन किया । सारी बात उसे बताई ।



विनय बरूटा ने ये कहकर फोन बंद कर दिया कि वो आ रहा है ।



"जो भी हुआ, वहुत बुरा हुआ । हम सोच भी नहीं सकते ये कि ऐसा हो सकता है ।" एक आदमी पास आता कह उठा ।




"'विनय बरूटा आ रहा है ।" सेम ने उससे कहा…
जेम डिमोरा के आने तक, मामला बो ही संभालेगा ।"




"विनय वरूटा तो जैम डिमोरा का दोस्त है । मैं उससे कभी नहीं मिला ।"



" हां वो ही । ओमी जानता है उसे, मिल चुका है ।" सैम ने गम्भिर स्वर मे कहा ।



" मुझे ये नहीं समझ आता कि किसी को कैसे पता चला कि यहां रखी तिजोरी में दौलत है । हमने दोलत रखी और रात को कोई लोग तिजोरी खोलकर, उसे ले गए । ये तो हैरानी वाली बात है कि उन्होंने तिजोरी का हेडिल भी तैयार कर लिया । तिजोरी का कम्बीनेशन नम्बर भी लगा लिया, जबकि कम्पनी कहती थी कि कोई भी तिजोरी को . . . ।"



तभी सोहनलाल की कराह उभरी ।



सोहनलाल को होश आना शुरू हो गया था ।



"इसे होश आ रहा है ।" एक के होंठों से निकला ।


तिजोरी के पास खड़े तीनों भी पास आ गए ।


ओमी खुराम के होंठ भींच गए ।



सोहनलाल का शरीर हिलने लगा था फिर एकाएक उसकी आंखे खुल गई ।



वो उठ बैठा ।



सबकी खतरनाक निगाह सोहनलाल पर थी ।

सोहनलाल अजीब-सी निगाहों से उन सबको देखने लगा ।

उसका हाथ कनपटी पर पहुच गया था । जहाँ चोट मारकर उसे बेहोश किया गया था ।


फौरन ही सब कुछ याद आ गया था ।



पावड़े ने चोट मारकर बेहोश किया था । वो तो उसे शूट करने वाला था कि तभी रघु आ गया तो पावड़े को अपना प्रोग्राम बदलना पड़ा था ।




हरामी पावडे को नहीं छोडूंगा, परंतु ये लोग कौन हैं. . .सोहनलाल ने घडी देखी । सुबह के छ: बजने वाले थे ।



इतनी जल्दी जैम डिपोरा के आदमी नहीं आ सकते । सोहनलाल को लगा, नई मुसीबत में फंस गया है ।



अगले ही पल उन लोगों के चेहरे ठीक से देखने के बाद वो समझ गया कि ये जैम डिमोरा के ही लोग हैं । इन्हे उस दिन देखा था, जब ये लोग तिजोरी लेकर आए थे । परंतु इतनी सुबह कैसे यहाँ पहुंच गए? ये तो दस-ग्यारह बजे फेरा लगाते है ।



" होश आ गया तुम्हें ।" सेम ने खतरनाक स्वर में कहा-----"तुमने जैम डिपोरा के दौलत लूट ली तिजोरी से । लगता है कोई खास बात ही होगी जो तुम्हारे साथी बेहोश करके यहाँ छोड़ गए । कौन हैं तुम्हारे साथी?"



सोहनलाल उठ बैठा कि तभी उसकी निगाह पास पड़े राने ग्रोवर की लाश पर पडी । उसने तुरंत मुंह फेर लिया ।



"हमारे एक आदमी को तुम लोगों ने मार दिया । दूसरा मरने की हालत में है ।" सेम ने कहा ।



" दूसरा ?"सोहनलाल ने सेम को देखा ।


"जो दरवाजे के बाहर था । "


"वो जिंदा है!"' सोहनलाल की आंखें सिकुडी ।


"किस्मत से । उसी ने फोन करके यहां हालातों की जानकारी दी ।" सैम का खतरनाक स्वर सुनकर सोहनलाल सम्भल गया ।



सोहनलाल को लगा जैसे मुसीबते अब शुरू हुई हैं ।


"तुम लोग कब से तैयारी कर रहे थे तिजोरी खोलने की?
ओमी खुराम बोला ।



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जिस दिन से तिजोरी यहीं फिट की गई ।



"ओह तो तुम्हें तिजोरी फिट करने का दिन भी पता है ।" ओमी खुराम के दांत भींच गए---------"हमारे कामों की तुम्हें खबर कैसे लगी?"



"मुझें नहीं पता ।"


"सच बताओं…वरना ।"


"ये खबर मेरा साथी लाया था । उसने मुझे नहीं बताया कि खबर कहां से मिली उसे ।" सोहनलाल ने कहा ।



"झूठ मत बोलो ।" ओमी खुराम गुर्राकर बोला ।



सोहनलाल ने उसे देखा । कहा कुछ नहीं ।

"अपने साथियों के नाम बताओ, ये भी कि के दौलत लेकर कहां गए है ।" ओमी खुराम ने दांत भींचकर कहा ।

सोहनलाल चुप रहा ।


"जिंदा रहना चाहते हो तो हमारी बातों का जवाब देते रहो ।"



"तुम लोगों के साथियों की मौत का दुख है मुझे । मैं नहीं चाहता था कि उनकी जान जाए । परंतु मेरे बस में कुछ नहीं था । इसी वजह से मेरौ मेरे साथियों से कहा-सुनी हुई और वो बेहोश कर गए ।" सोहनलाल गम्भीर स्वर में बोला ।



"मैँने तुमसे कहा है कि तुम्हारे साथी दौलत लेकर कहाँ गए?" ओमी खुराम ने खतरनाक स्वर में पूछा ।



सोहनलाल ने सोच भरी निगाहों से ओमी खुराम को देखा।



"बताओ ।
ओमी खुराम गुर्रा उठा ।



"वैसे तो मैं तुम्हें ये बात कभी नहीं बताता, परंतु वो लोग मुझे बेहोश करके यहां छोड़ गए, इसलिए बता रहा हू कि उनके नाम विकी पावड़े और रघु है और पावड़े दौलत लेकर अपने घर जाने वाला था ।"



"तुम तीन ही थे इस काम में?"



"हां ।"



"विकी पावड़े का पता बोलो ।"



सोहनलाल ने विकी पावड़े का पता बता दिया ।



खुराम ने फौरन सैम से कहा ।



"तुम सबको लेकर इस पते पर जाओ । मैं इसके पास रहूंगा । विनय बरूटा भी यहां पहुंचता ही होगा ।"



"विनय बरूटा?" सोहनलाल चौका ।



सेम फौरन ही अन्य चारों के साथ वहां से चला गया ।



"तुम विनय बरूटा के यहां आने के बारे मे कह रहे थे ।" सोहनलाल बोला ।



ओमी खुराम ने सोहनलाल को मौत की-सी निगाहों से देखते कहा ।



"जानते हो विनय बरूटा को?"



"थोडा-सा ।" सोहनलाल ने गहरी सांस ली ।


" उससे मिले हो?"


सोहनलाल ने हाँ में सिर हिला दिया ।



ओमी खुराम की आंखें सिकुडी ।



"कहीं तुम्हें विनय बरूटा ने तो यहां की खबर नहीं दी !"


"नहीं ।
सोहनलाल ने गम्भीर स्वर में कहा--------"मेरा उसका कोई मतलब नहीं ।"



"सच कह रहे हो?




" हां ।"



"तुम्हें यहां की जानकारी कैसे मिली?"


"बताया तो तुम्हें ।"

सोहनलाल चुप रहा ।


"जिंदा रहना चाहते हो तो हमारी बातों का जवाब देते रहो ।"



"तुम लोगों के साथियों की मौत का दुख है मुझे । मैं नहीं चाहता था कि उनकी जान जाए । परंतु मेरे बस में कुछ नहीं था । इसी वजह से मेरौ मेरे साथियों से कहा-सुनी हुई और वो बेहोश कर गए ।" सोहनलाल गम्भीर स्वर में बोला ।



"मैँने तुमसे कहा है कि तुम्हारे साथी दौलत लेकर कहाँ गए?" ओमी खुराम ने खतरनाक स्वर में पूछा ।



सोहनलाल ने सोच भरी निगाहों से ओमी खुराम को देखा।



"बताओ ।
ओमी खुराम गुर्रा उठा ।



"वैसे तो मैं तुम्हें ये बात कभी नहीं बताता, परंतु वो लोग मुझे बेहोश करके यहां छोड़ गए, इसलिए बता रहा हू कि उनके नाम विकी पावड़े और रघु है और पावड़े दौलत लेकर अपने घर जाने वाला था ।"



"तुम तीन ही थे इस काम में?"



"हां ।"



"विकी पावड़े का पता बोलो ।"

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सोहनलाल ने विकी पावड़े का पता बता दिया ।



खुराम ने फौरन सैम से कहा ।



"तुम सबको लेकर इस पते पर जाओ । मैं इसके पास रहूंगा । विनय बरूटा भी यहां पहुंचता ही होगा ।"



"विनय बरूटा?" सोहनलाल चौका ।



सेम फौरन ही अन्य चारों के साथ वहां से चला गया ।



"तुम विनय बरूटा के यहां आने के बारे मे कह रहे थे ।" सोहनलाल बोला ।



ओमी खुराम ने सोहनलाल को मौत की-सी निगाहों से देखते कहा ।



"जानते हो विनय बरूटा को?"



"थोडा-सा ।" सोहनलाल ने गहरी सांस ली ।


" उससे मिले हो?"


सोहनलाल ने हाँ में सिर हिला दिया ।



ओमी खुराम की आंखें सिकुडी ।



"कहीं तुम्हें विनय बरूटा ने तो यहां की खबर नहीं दी !"


"नहीं ।
सोहनलाल ने गम्भीर स्वर में कहा--------"मेरा उसका कोई मतलब नहीं ।"



"सच कह रहे हो?




" हां ।"



"तुम्हें यहां की जानकारी कैसे मिली?"


"बताया तो तुम्हें ।"

"परंतु मुझे तुम्हारी बात पर भरोसा नहीं कि तुम्हरि साथी ने तुम्हें ये बात न बताई हो ।"


अब वो मेरा साथी नहीं है । वो मुझें बेहोश करके सारी दौलत ले गया । उसके मेरे रास्ते अलग हो गए ।"



"मेरे खयाल में तुम हालातों को ठीक से समझ नहीं रहे हो ।" ओमी खुराम ने अपने स्वर के भावों पर काबू पाते हुए कहा…
ये मामला जैम डिमोरा जैसे इंसान से वास्ता रखता । सारी दौलत जैम डिमोरा की है जिस पर तुम लोगों ने हाथ डाला है ।"




सोहनलाल खामोशी-से ओमी खुराम को देखता रहा ।



" जैम डिमोरा के बारे मे जानते हो?"


"थोडा-बहुत ।"



मतलब जानते हो । तुम जिस स्थिति में हमारे हाथ लगे, राने की लाश यहां पडी है । अज्जू का कुछ पता नहीं कि दो वच पाता है या नहीं । ऐसे में तुम तो बचने वाले नहीं । जैम डिमोरा तुम्हें जिंदा नहीं ष्ठोंड़ेगा । अगर बचना चाहते हो तो कोई काम की जानकारी दो ।"



" काम की जानकारी?"



" जैसे कि ये बताओं कि तुम लोगों को यहां रखी दौलत के बारे में किसने बताया?"



"बताया तो मैं बच सकूंगा ?"



" खबर काम की निकली तो तुम बच सकते हो ।




"शायद खबर काम की है ।" सोहनलाल ने सोच भरे गम्भीर स्वर में कहा ।



तो बताओ ?" ओमी खुराम की निगाह सोहनलाल के चेहरे पर थ्री ।



" विकी पावड़े, जिसके बारे में मैंने अभी बताया ।"



"हां ?"



वो विनय बरूटा के लिए काम कर रहा है इन दिनों !"



"क्या?" ओमी खुराम चौका ।



" पावड़े ने मुझे ये ही बताया ।"



" तुम्हारा मतलब कि पावड़े के पीछे विनय वरूटा है ।" ओमी खुराम की आखे सिकुडी ।



" मै ये नहीं कह रहा । ये कह रहा हू कि पावड़े ने बताया वो इन दिनों विनय बरूटा के लिए काम कर रहा है । सारी खबरे उसे वरूटा से ही मिल रही है । परंतु उसने बताया कि यहाँ पर हाथ मारने का फैसला पावड़े का अपना है ।"


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" ऐसा विकी पावड़े ने तुम्हे कहा, लेकिन क्या पता इसके पीछे विनय बरूटा का ही दिमाग चल रहा हो ।"


"ये मुझे नहीं पता ।"

"नहीं फ्ता?"


"नहीं । पता होता तो जरूर बताता । मेरे खयाल में तो पावड़े ने ये सव्र अपने दम पर ही किया ।"



"मैं तुम्हें एक आदमी का हुलिया बताता हूं । तुम बताना कि क्या ये ही पावड़े है ।" ओमी खुराम ने पावड़े का हुलिया बताया ।



"हां ।" हुलिया सुनकर सोहनलाल ने कहा…"ये पावड़े का हुलिया ही तुमने बताया । तुम इसे कहां मिले?"



"एक बार विनय वरूटा से मिला था तो इस हुलिये का आदमी उसके साथ था ।"



वो पावड़े ही रहा होगा ।" सोहनलाल बोला----" अब मेरी जान बख़शी हो सकती है?"



"इसका फैसला जैम डिमोरा ही करेगा । पर ये बात तुमने काम की बताई कि दौलत लूटने वाला विनय वरूटा का साथी है ।" खुराम के चेहरे पर अजीब… भाव उभरे------" बरूटा खुद डकैतियाँ करता है, पंद्रह-बीस अरब की दोलत देखकर, उसे लूटने का प्रोग्राम वना लिया हो तो, इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए ।"



"ये तुम कह रहे हो, ऐसा मैंने नहीं कहा ।"



हां । तुम्हारी बाते सुनकर कुछ ऐसा ही नतीजा निकलता है । तुम्हारा नाम क्या है?"




"सोहनलाल ।"



" तिजोरी किसने खोली ?"



"मैने?




"तुमने ?" ओमी खुराम ने सोहनलाल की आंखों में झांका । "



" ये ही काम करता हूं । विनय वरूटा को पता है ।"



"हैरानी की बात है कि तीन लोगों ने तिजोरी में से दौलत लूटी और उनमे से दो बरूटा से मिल चुके है ।"



मैंने कहा ना कि मेरी तरफ से इस मामले में विनय बरूटा का हाथ नहीं है ।" सोहनलाल कह उठा ।



" तीसरा, जिसका नाम तुमने रघु बताया था, वो भी बरूटा से मिल चुका है ?"



"मैं नहीं जानता । पर मेरे खयाल से नहीं मिला ।"



तुमने तो वहुत दिलचस्प बाते बताई । जैम डिमोरा को ये सब सुनना अच्छा लगेगा ।"



"अभी जैम डिमोरा से बात करोगे?"



"फोन पर बात होगी, जैम डिमोरा को ये बातें बताना जरूरी. .. ।"



"मेरे बोरे में पूछ लेना कि अगर वो मुझे जाने दे तो. . . ।"



तुमसे तो परसों जैम डिमोरा मिलेगा । परसों वो इंडिया आ रहा है।"
ओमी खुराम ने जेब से फोन निकालते हुए कहा-----"मुझें विश्वास होता जा रहा है इस मामले के पीछे विनय वरंटा का ही हाथ है । उसके इशारे पर ही दौलत पर हाथ डाला गया । उसने विकी पावड़े को आगे कर दिया और खुद पीछे रहा । ये ही हुआ होगा ।"




सोहनलाल चुप रहा। खुराम ने जैम डिमोरा का नम्बर मिलाया और फोन कान से लगा लिया ।



बात हो गई । ओमी खुराम, जैम डिमोरा को सारे हालात बताने लगा ।



सोहनलाल खामोशी से बैठा सुनता रहा ।


अपनी स्थिति पर गौर करता रहा । ये बात उसे साफ़तौर पर महसूस हो रही थी कि वो बुरी तरह फंस चुका है । जैम डिमोरा उसे छोड़ने वाला नहीं । उसे बातों में व्यस्त पाकर एकाएक सोहनलाल खड़ा हुआ । उसका इरादा दरवाजे से बाहर निकलकर, शो-कैस के रास्ते बुटीक से बाहर चले जाने का था । परं उसके खडे होते ही बाते करते… ओमी खुराम ने फुर्ती से रिवॉल्वर निकाली और उसे नीचे बैठ जाने का इशारा किया ।



सोहनलाल को वापस बैठना पड़ा ।



ओमी खुराम ने फोन बंद करके जेब में रखा और बोला ।



"यहां से खिसकने की सोच रहे थे?"



"टांगे सीधी करने के लिए उठा था ।" सोहनलाल ने सामान्य स्वर में कहा ।



"अपनी टांर्गो को सम्भाल के रखो ।" ओमी खुराम ने चुभते स्वर में कहा ।



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Old 08-09-2016, 03:13 PM   #88
VARSHNEY.009
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" जैम डिमोरा क्या बोला ?"


"उससे तुम्हें कोई मतलब नहीं ।" ओमी खुराम बोला…"पावड़े ने तुम्हें ये ही कहा था कि वे दौलत लेकर अपने पलैट पर जाएगा ।"



" हां ?" पहले तो ये ही प्रोग्राम था । कहीं मेरी वजह से प्रोग्राम बदल न गया हो?"



पता चल जाएगा !"


सोहनलाल ने बैठे-बैठे अपनी जेब में हाथ डाला । ओमी खुराम ने तुरंत उसकी तरफ रिबाल्बर कर दी ।



"मेरे पास हथियार नहीं है । मैं हथियार नहीं रखता । तलाशी ले लो । सिग्रेट निकाल रहा हू ।" सोहनलाल बोला ।



सोहनलाल ने सिगरेट निकाली ।




"खडे हो जाओ ।" सोहनलाल के खड़ा हो जाने पर ओमी खुराम ने एक हाथ में रिवॉल्वर पकडे दूसरे हाथ से सोहनलाल की तलाशी ली फिर पीछे हटते हुए रिवॉल्बर जेब में रख ली ।



उसके चेहरे पर सख्ती ठहरी हुई थी ।




सोहनलाल पुन: नीचे बैठ गया । सिग्रेट सुलगा ली ।

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