My Hindi Forum

Go Back   My Hindi Forum > Art & Literature > Hindi Literature

Reply
 
Thread Tools Display Modes
Old 18-11-2015, 10:35 PM   #341
rajnish manga
Super Moderator
 
rajnish manga's Avatar
 
Join Date: Aug 2012
Location: Faridabad, Haryana, India
Posts: 11,965
Thanks: 4,726
Thanked 4,217 Times in 3,273 Posts
Rep Power: 225
rajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

श्रीनगर (कश्मीर) की वो शाम


13 नवम्बर शुक्रवार के दिन पेरिस में आतंकवादी हमला हुआ है. लगभग 150 निर्दोष व्यक्ति मारे गए हैं और 200 के करीब घायलों का इलाज अस्पतालों में चल रहा है. दुनिया भर के देशों ने इस नृशंस हत्याकांड की निंदा की है. कई पश्चिमी देशों ने is या isis (इस्लामिक स्टेट नामक आतंकवादी संगठन जिसने पेरिस में हुए सीरियल ब्लास्ट की ज़िम्मेदारी ली है) को जड़ से उखाड़ फेंकने का ऐलान किया है. फ़्रांस ने तो इसके विरुद्ध पहले से जारी हमले और तेज कर दिए हैं. भारत में भी फ्रांस में हुए हमलों के विरुद्ध लोगों में आक्रोश है. कई जगह कैंडल लाइट जलूस निकाले गए हैं. मीडिया- प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक दोनों में इसके विरोध की अनुगूंज सुनाई दे रही है. टीवी पर बहसें हो रही हैं. मुख्य मुद्दा यह है कि भारत में मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा फ्रांस में हुए वहशियाना हमलों और कत्लेआम की पुरज़ोर तरीके से निंदा क्यों नहीं की गयी? ऐसे माहौल में मुझे अपने जीवन की एक घटना याद आती है जिसे मैं आप सब के साथ बांटना चाहता हूँ.

__________________
आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (ऋग्वेद)
(Let noble thoughts come to us from every side)

Last edited by rajnish manga; 18-11-2015 at 10:47 PM.
rajnish manga is offline   Reply With Quote
Old 18-11-2015, 10:51 PM   #342
rajnish manga
Super Moderator
 
rajnish manga's Avatar
 
Join Date: Aug 2012
Location: Faridabad, Haryana, India
Posts: 11,965
Thanks: 4,726
Thanked 4,217 Times in 3,273 Posts
Rep Power: 225
rajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

श्रीनगर (कश्मीर) की वो शाम

सन 1980 > 1982 के उन दिनों मेरी पोस्टिंग श्रीनगर में थी. एक दिन शाम को ऑफिस से घर जाने के लिए बाहर निकला और स्कूटर स्टार्ट करने लगा तो स्कूटर स्टार्ट नहीं हुआ. रिज़र्व चेक किया, चोक भी ऑन करके देखा, लेकिन स्कूटर स्टार्ट नहीं हुआ. मुझे लगा कि पेट्रोल ही न खत्म हो गया हो. पेट्रोल की टंकी का ढक्कन खोल कर देख तो अँधेरे की वजह से कुछ न दिखाई दिया. मुझे पता नहीं क्या सूझा कि मैंने पास खड़े किसी व्यक्ति से दियासलाई (माचिस) ले कर जलाई और उसकी जलती हुई लौ को स्कूटर की टंकी के मुँह के पास यह जानने के लिए कि पेट्रोल कितना है, ले गया. बस, ऐसा करना था कि टंकी में आग लग गई. जाहिरा तौर पर पेट्रोल कम था इसलिए लपटें भयंकर नहीं थी. लेकिन कुछ भी कहें, आग तो अँधेरे में अच्छी खासी दिख रही थी. आते जाते कुछ लोग वहाँ जमा हो गए. आसपास के दुकानदार भी भाग कर आ गये. कुछ मुझे जानते थे. हम अभी ये सोच ही रहे थे कि क्या करें (क्योंकि पानी डालने से आग और भड़क सकती थी) कि इतने में एक बहुत साधारण लगने वाला एक व्यक्ति वहाँ आया और उसने अपना फिरन (सर्दी से बचने के लिए कश्मीरी लोगों द्वारा पहना जाने वाला लंबा चोगा) उतारा और उससे आग के ऊपर मारने लगा. चार छः बार मारने के बाद आग बुझ गई. मैंने उसे धन्यवाद दिया और अपने एक मुस्लिम मित्र की सहायता से बातचीत करके उसे कुछ पैसे दिए. उसकी बहादुरी और दूरंदेशी से मेरे स्कूटर का अधिक नुक्सान होने से बच गया. मेरी मदद करने वाला वह व्यक्ति भी एक मुसलमान था. मैं आज भी उसका एहसान नहीं भूला हूँ.

__________________
आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (ऋग्वेद)
(Let noble thoughts come to us from every side)
rajnish manga is offline   Reply With Quote
Old 21-01-2016, 07:35 PM   #343
rajnish manga
Super Moderator
 
rajnish manga's Avatar
 
Join Date: Aug 2012
Location: Faridabad, Haryana, India
Posts: 11,965
Thanks: 4,726
Thanked 4,217 Times in 3,273 Posts
Rep Power: 225
rajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

आप उन्हें जानते हैं मगर पूरी तरह नहीं
साभार: बी.एम.अगरवाल


एक 21 साल का व्यक्ति व्यापार में विफल रहा, 22 साल की उम्र में एक विधायी चुनाव हारा, 24 साल की उम्र के कारोबार में फिर से विफल रहा. 26 साल की उम्र में उनकी पत्नी का निधन हो गया, 27 साल की उम्र में उन्हें तंत्रिका-विकार (nervous breakdown) हुआ; 34 साल की उम्र में कांग्रेस का चुनाव हारा, 45 साल की उम्र में एक प्रशासनिक समितीय चुनाव हारा, 47 साल की उम्र में उपाध्यक्ष बनने के प्रयास में विफल रहा, 49 साल की उम्र में एक प्रशासनिक समितीय चुनाव हारा, और 52 साल की उम्र में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए. यह आदमी अब्राहम लिंकन था. क्या आप उसे एक विफलता कहोगे? और कोई होता तो शायद हार मान लेता. लेकिन लिंकन हार मानना शायद सीखा ही नहीं था.
__________________
आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (ऋग्वेद)
(Let noble thoughts come to us from every side)

Last edited by rajnish manga; 21-01-2016 at 08:26 PM.
rajnish manga is offline   Reply With Quote
Old 21-01-2016, 07:42 PM   #344
rajnish manga
Super Moderator
 
rajnish manga's Avatar
 
Join Date: Aug 2012
Location: Faridabad, Haryana, India
Posts: 11,965
Thanks: 4,726
Thanked 4,217 Times in 3,273 Posts
Rep Power: 225
rajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

kfc के कर्नल सैंडर्स


kfc आज एक विश्वप्रसिद्ध ब्रैंड के रूप में जाना जाता है. kfc के कर्नल सैंडर्स को 65 साल की उम्र में एहसास हुआ, जो कुछ उनके पास था (एक टूटी कार और 100 डॉलर) वह कुछ भी नहीं था. तभी उन्हें अपनी मां का नुस्खा याद आया और वह उसे बेचने के लिए निकल पड़े. जानते हैं, अपना पहला आर्डर पाने से पहले उन्होंने कितने दरवाजे खटखटाए होंगे? अनुमान है कि अपना पहला आर्डर पाने से पहले उन्होंने एक हजार से अधिक दरवाजों पर दस्तक दी थी. अधिकतर लोग दो तीन कोशिशों के बाद हार मान कर बैठ जाते हैं और कहते हैं जो कुछ हम कर सकते हैं, हमने किया.



__________________
आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (ऋग्वेद)
(Let noble thoughts come to us from every side)
rajnish manga is offline   Reply With Quote
Old 21-01-2016, 07:53 PM   #345
rajnish manga
Super Moderator
 
rajnish manga's Avatar
 
Join Date: Aug 2012
Location: Faridabad, Haryana, India
Posts: 11,965
Thanks: 4,726
Thanked 4,217 Times in 3,273 Posts
Rep Power: 225
rajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

वाल्ट डिज़्नी
WALT DISNEY



^

एक युवा कार्टूनिस्ट के रूप में, वॉल्ट डिज्नी की प्रतिभा को पहचानने से अखबार वालों ने इनकार कर दिया. कई अखबार के संपादकों से उन्हें अस्वीकृति (rejections) का सामना करना पड़ा. एक दिन एक चर्च में एक मंत्री ने कुछ कार्टून बनाने के लिए उसे काम पर रखा. डिज्नी चर्च के पास एक छोटे से शेड के बाहर काम कर रहा था. उस शेड में चूहों ने उधम मचा रखा था. एक छोटे चूहे को देख कर डिज्नी को प्रेरणा मिली. यहीं से मिकी-माउस का जन्म हुआ.
__________________
आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (ऋग्वेद)
(Let noble thoughts come to us from every side)
rajnish manga is offline   Reply With Quote
Old 21-01-2016, 08:02 PM   #346
rajnish manga
Super Moderator
 
rajnish manga's Avatar
 
Join Date: Aug 2012
Location: Faridabad, Haryana, India
Posts: 11,965
Thanks: 4,726
Thanked 4,217 Times in 3,273 Posts
Rep Power: 225
rajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

थॉमस अल्वा एडिसन
Thomas Alva Edison
(February 11, 1847 October 18, 1931)





एक दिन एक आंशिक रूप से बधिर (deaf), चार साल का बच्चा अपने घर आया तो उसकी जेब में उसके शिक्षक द्वारा लिखा एक नोट था. नोट में लिखा था, "आपका टॉमी मूर्ख है, यह कुछ भी नहीं सीख सकता. इसे स्कूल से निकाल लीजिये." उसकी मां ने पत्र पढ़ा और उत्तर दिया, " मेरा टॉमी मूर्ख नहीं है, मैं उसे अपने आप सिखाऊंगी." और यही टॉमी बड़ा हो कर महान थॉमस एडीसन बना. थॉमस एडीसन की औपचारिक स्कूली शिक्षा केवल तीन महीने की थी और वह आंशिक रूप से बहरा था. जब थॉमस एडीसन बल्ब पर काम कर रहा था, वह लगभग 10,000 बार असफल रहा. क्या यह विफलता थी?
__________________
आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (ऋग्वेद)
(Let noble thoughts come to us from every side)
rajnish manga is offline   Reply With Quote
Old 21-01-2016, 08:32 PM   #347
rajnish manga
Super Moderator
 
rajnish manga's Avatar
 
Join Date: Aug 2012
Location: Faridabad, Haryana, India
Posts: 11,965
Thanks: 4,726
Thanked 4,217 Times in 3,273 Posts
Rep Power: 225
rajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

हेनरी फोर्ड:

हेनरी फोर्ड अपनी पहली कार में रिवर्स गियर बनाना भूल गया. क्या यह विफलता थी?

बीथोवेन:
युवा बीथोवेन से कहा गया कि उसमें संगीत के लिए कोई प्रतिभा नहीं थी, लेकिन वह दुनिया के लिए कुछ सर्वश्रेष्ठ संगीत दे गया.

क्या आप इन लोगों को असफल मानते हैं? वे सब के सब अभावों में रहते हुए, समस्याओं के बावजूद सफल रहे. लोगों को शायद यह लगता हो कि वे भाग्यशाली थे. परन्तु उनकी सफलता का राज था निरंतर परिश्रम.

सफलता की सभी कहानियां, महान असफलताओं की कहानियाँ हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि वे लोग विफल रहने पर हार कर नहीं बैठे, अपनी विफलताओं से सबक लेते हुए अपने कार्य में लगे रहे. आप भी अपनी विफलताओं से सीखें और आगे बढ़ें.
दोस्तों! इंसान जब प्रयत्न करता है तब या तो वह सफल हो जाता है या कुछ सीख जाता है.

कविवर हरिवंश राय बच्चन
कविवर हरिवंश राय बच्चन की कविता की कुछ पंक्तियां यहां उद्धृत करना चाहूँगा:
असफलता एक चुनौती है... स्वीकार करो...
क्या कमी रह गयी, देखो और सुधार करो...
जब तक ना सफल हो नींद-चैन को त्यागो तुम...
संघर्षों का मैदान छोड़ मत भागो तुम...
कुछ किये बिना ही जयजयकार नहीं होती...
हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती...


__________________
आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (ऋग्वेद)
(Let noble thoughts come to us from every side)
rajnish manga is offline   Reply With Quote
Old 22-01-2016, 11:27 PM   #348
soni pushpa
Diligent Member
 
Join Date: May 2014
Location: east africa
Posts: 1,250
Thanks: 1,371
Thanked 1,042 Times in 744 Posts
Rep Power: 57
soni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond reputesoni pushpa has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

असफलता की वजह से हारे लोगों के लिए बहुत बड़ी बात है इस आलेख में भाई बहुत बहुत धन्यवाद शेयरिंग के लिए
soni pushpa is offline   Reply With Quote
The Following User Says Thank You to soni pushpa For This Useful Post:
rajnish manga (23-01-2016)
Old 15-03-2016, 02:18 PM   #349
rajnish manga
Super Moderator
 
rajnish manga's Avatar
 
Join Date: Aug 2012
Location: Faridabad, Haryana, India
Posts: 11,965
Thanks: 4,726
Thanked 4,217 Times in 3,273 Posts
Rep Power: 225
rajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

हम चिल्लाते क्यों हैं गुस्से में?

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा; बताओ जब दो लोग एक दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं?

शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक ने उत्तर दिया : हमअपनी शांति खो चुके होते हैं इसलिए चिल्लाने लगते हैं।

संत ने मुस्कुराते हुए कहा : दोनों लोग एक दूसरे के काफी करीब होते हैं तो फिर धीरे-धीरे भी तो बात कर सकते हैं। आखिर वह चिल्लाते क्यों हैं? कुछ और शिष्यों ने भी जवाब दिया लेकिन संत संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने खुद उत्तर देना शुरू किया।

वह बोले : जब दो लोग एक दूसरे से नाराज होते हैं तो उनके दिलों में दूरियां बहुत बढ़ जाती हैं। जब दूरियां बढ़ जाएं तो आवाज को पहुंचाने के लिए उसका तेज होना जरूरी है। दूरियां जितनी ज्यादा होंगी उतनी तेज चिल्लाना पड़ेगा। दिलों की यह दूरियां ही दो गुस्साए लोगों को चिल्लाने पर मजबूर कर देती हैं।
जब दो लोगों में प्रेम होता है तो वह एक दूसरे से बड़े आराम से और धीरे-धीरे बात करते हैं। प्रेम दिलों को करीब लाता है और करीब तक आवाज पहुंचाने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं।

जब दो लोगों में प्रेम और भी प्रगाढ़ हो जाता है तो वह खुसफुसा कर भी एक दूसरे तक अपनी बात पहुंचा लेते हैं। इसके बाद प्रेम की एक अवस्था यह भी आती है कि खुसफुसाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

एक दूसरे की आंख में देख कर ही समझ आ जाता है कि क्या कहा जा रहा है।

शिष्यों की तरफ देखते हुए संत बोले : अब जब भी कभी बहस करें तो दिलों की दूरियों को न बढ़ने दें। शांत चित्त और धीमी आवाज में बात करें। ध्यान रखें कि कहीं दूरियां इतनी न बढ़े जाएं कि वापस आना ही मुमकिन न हो।


__________________
आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (ऋग्वेद)
(Let noble thoughts come to us from every side)
rajnish manga is offline   Reply With Quote
The Following User Says Thank You to rajnish manga For This Useful Post:
Pavitra (22-04-2016)
Old 25-03-2016, 03:13 PM   #350
rajnish manga
Super Moderator
 
rajnish manga's Avatar
 
Join Date: Aug 2012
Location: Faridabad, Haryana, India
Posts: 11,965
Thanks: 4,726
Thanked 4,217 Times in 3,273 Posts
Rep Power: 225
rajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond reputerajnish manga has a reputation beyond repute
Default Re: इधर-उधर से

घाघरै में अलार्म घड़ी
(राजस्थानी भाषा का एक रोचक संस्मरण)
साभार: बैजनाथ पंवार (रतननगर-चूरू)

सन् 1954 री बात है। म्हैं अनूप शहर (तहसील-भादरा) री स्कूल में मास्टर हो। स्कूल में झाड़ू-बुहारी अर पाणी रा घड़िया ल्यावण सारू अेक बामणी दादी ही। बीं रो अेक बेटो बीरूराम ग्राम पंचायत में सैकेटरी रो काम भी कर्या करतो।

स्कूल मे म्हारी अेक निजी अलार्म घड़ी ही। कई बार भादरा जावणो पड़तो तद अलार्म लगा'र सोंवतो। स्कूल रै टेम पर घंटी भी अलार्म घड़ी नैं देख'र ई बजाया करता। ठैसण जावणिया भी गाड़ी रो टेम बूझ लिया करता। बां दिनां आजकाल री दांई हर कोई रै कनैं घड़ी कोनीं हुया करती।

एक दिन स्कूल री छुट्टी रै दिन म्हारी अलार्म घड़ी गायब हुयगी। म्हैं स्कूल रै दोनूं-तीनूं कमरां में देखली-टाबरां नैं बूझ्यो, पण कोनि मिली नीं। म्हारै घणी गिरगिराटी हुई। उजाड़ री समाई भी हुवणी दो'री। बीं बगत बामणी दादी स्कूल री झाड़ू-बुहारी कर'र स्कूल सूं निसरण लागी तो चाणचकै ही अलार्म री घंटी सुणीजी। म्हैं अठीनैं-बठीनैं देख्यो तो कठैई कीं को सूझ्यो नीं। म्हैं घणो ध्यान लगा'र सुण्यो अर देख्यो तो अलार्म घड़ी दादी रै घाघरै में बाजण लाग रैई है। दादी आपरै घाघरै नैं घणोई दाबै पण अलार्म बंद करणी आवै कोनि। छेकड़ अलार्म री चाबी खतम हुवणै सूं घंटी भी ढबगी।

म्हनैं अचंभो हुयो अर सागै-सागै हंसी भी आवै। दादी री फोटू देखणै लायक ही। म्हैं बूझ्यो, दादी ! आ बात अयां क्यां हुई?'

दादी नीचै धूण घाल्यां बोली, 'अलमारी में घड़ी पड़ी देख'र म्हारो मन चालग्यो। राम निसरग्यो। घड़ी उठाली, पण लुकावण नैं जगां को लादी नीं, जद घाघरियै रै नाड़ै सूं अलार्म घड़ी बांध'र घाघरै में लटकाली। म्हनैं कांई ठाह इण में कांई बलाय ही, जकी अयां रोळो करसी?'

म्हैं दादी नैं हिवळांस बंधावंतो बोल्यो, 'जा थारै घरै जा। म्हैं आ बात कोई नैं को बताऊंगा नीं।'

दादी आपरै घाघरै रै नाड़ै सूं घड़ी खोल'र म्हनैं संभळायी अर गोडां पर हाथ टेक'र उठी अर होळै-होळै आपरै घर कानी रिगसगी।

अब भी जद-जद घड़ी रै अलार्म देवूं तो दादी वाळी बात अर बीं रै साथै हंसी आयै बिनां को रैवैनीं।
__________________
आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (ऋग्वेद)
(Let noble thoughts come to us from every side)
rajnish manga is offline   Reply With Quote
Reply

Bookmarks

Tags
इधर उधर से, idhar udhar se, misc, potpourri, yahan vahan se

Thread Tools
Display Modes

Posting Rules
You may not post new threads
You may not post replies
You may not post attachments
You may not edit your posts

BB code is On
Smilies are On
[IMG] code is On
HTML code is Off



All times are GMT +5.5. The time now is 05:38 AM.


Powered by: vBulletin
Copyright ©2000 - 2017, Jelsoft Enterprises Ltd.
MyHindiForum.com is not responsible for the views and opinion of the posters. The posters and only posters shall be liable for any copyright infringement.