गुलज़ार शायरी

जब भी ये दिल उदास होता है
जाने कौन आस-पास होता है
 
फिर वहीं लौट के जाना होगा
यार ने कैसी रिहाई दी है
 
वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था
 
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