गुलज़ार शायरी

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1. ज़िंदगी और वक्त पर शायरी​

"वक़्त चलता है, रुकती नहीं ज़िंदगी,
बस कुछ यादें पीछे छूट जाती हैं,
कुछ लोग मिलते हैं सफ़र में,
और कुछ दूर जाकर तन्हा छोड़ जाते हैं।"

2. प्यार और तन्हाई​

"कुछ इस तरह से तेरी और मेरी कहानी है,
एक अधूरी सी ख़्वाहिश और आँखों में पानी है,
तू पास होकर भी मीलों दूर है मुझसे,
और ये दूरी ही अब मेरी ज़िंदगानी है।"

3. दिल की बातें​

"कितनी अजीब है ये दुनिया की रीत भी,
जहाँ सब कुछ पाकर भी इंसान खो देता है,
मुस्कुराते हैं चेहरे यहाँ सबके पीछे,
और अंदर ही अंदर हर कोई रो देता है।"

4. उम्मीद और हौसला​

"हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं टूटा करते,
वक़्त की शाखों से लम्हे नहीं रूठा करते,
कोई अपना हो तो बस दिल से पुकारो उसे,
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो बाँटे नहीं जाते।"
 
आप के बा'द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
 
आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
 
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है
 
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
 
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
 
शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है
 
कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की
 
आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए'तिबार किया
 
जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है
 
हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया
 
कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है
 
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
 
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है
 
अपने साए से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा
 
मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है
 
तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं
 
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
 
दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में
 
एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है
मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की
 
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