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भारतीय भूगोल में नदियों का एक खास पैटर्न देखने को मिलता है। बचपन से हमें स्कूलों में यही पढ़ाया गया है कि देश की ज्यादातर बड़ी नदियाँ हिमालय या मध्य भारत के पहाड़ों से निकलती हैं और पूर्व दिशा की ओर बहते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती हैं। गंगा, यमुना और गोदावरी जैसी विशाल नदियाँ इसी नियम का पालन करती हैं।
लेकिन, भारत के दिल में एक ऐसी नदी है जो इस नियम को नहीं मानती। यह नदी भीड़ से अलग, उल्टी दिशा यानी पश्चिम (West) की ओर बहती है। हम बात कर रहे हैं— नर्मदा नदी की।
आखिर ऐसा क्यों है कि देश की इतनी विशाल नदी अपनी धारा के विपरीत दिशा में बहती है? क्या यह कोई चमत्कार है या इसके पीछे कोई गहरा विज्ञान छिपा है? आइए जानते हैं।
1. उल्टी दिशा में बहने की कहानी
नर्मदा नदी भारत की पांचवीं सबसे लंबी नदी है, जिसकी लंबाई लगभग 1,310 किलोमीटर है। जहाँ बाकी नदियाँ ढलान और सामान्य बहाव के साथ बंगाल की खाड़ी की ओर जाती हैं, वहीं नर्मदा अपना रास्ता खुद बनाते हुए अरब सागर (Arabian Sea) में जाकर मिलती है।ऐसा करने वाली यह अकेली नदी नहीं है (ताप्ती नदी भी इसी दिशा में बहती है), लेकिन अपने आकार और महत्व के कारण नर्मदा का यह 'विद्रोही' स्वभाव सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। इसे अक्सर "उल्टी बहने वाली नदी" कहा जाता है क्योंकि यह भारत के सामान्य रिवर फ्लो (River Flow) के विपरीत बहती है।
2. इसका उद्गम और सफर
नर्मदा का सफर मध्य प्रदेश के अमरकंटक की पहाड़ियों से शुरू होता है, जो एक पवित्र तीर्थ स्थल भी है। यहाँ से निकलकर यह नदी एक लंबा सफर तय करती है:- यह मध्य प्रदेश के घने जंगलों और पहाड़ों से गुजरती है।
- इसके बाद यह महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों को छूते हुए गुजरात में प्रवेश करती है।
- अंत में, यह गुजरात के भरूच के पास अरब सागर में विलीन हो जाती है।
3. वैज्ञानिक कारण: रिफ्ट वैली (Rift Valley) का रहस्य
अब सबसे बड़े सवाल पर आते हैं— आखिर नर्मदा पश्चिम की ओर क्यों बहती है? इसका जवाब 'जियोलॉजी' (Geology) यानी भूगर्भ विज्ञान में छिपा है।वैज्ञानिकों के अनुसार, नर्मदा नदी एक 'रिफ्ट वैली या भ्रंश घाटी से होकर बहती है।
- रिफ्ट वैली क्या है? लाखों साल पहले टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल से जमीन का एक हिस्सा नीचे धंस गया था, जिसे रिफ्ट वैली कहते हैं।
- दो पहाड़ों के बीच का रास्ता: नर्मदा नदी के उत्तर में विंध्याचल पर्वत (Vindhya Range) और दक्षिण में सतपुड़ा पर्वत (Satpura Range) खड़े हैं। नदी इन दो विशाल पर्वत श्रृंखलाओं के बीच फंसी हुई घाटी में बहती है।
- कुदरती ढलान: इस घाटी का ढलान कुदरती तौर पर पूर्व से पश्चिम की ओर है। पानी हमेशा ढलान की तरफ बहता है, इसलिए नर्मदा को पश्चिम की ओर बहना पड़ता है।
4. जीवनदायिनी नर्मदा: खेती और बिजली
नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और गुजरात की जीवनरेखा (Lifeline) है। इसका बेसिन (Basin) बहुत विशाल है:- ऊपरी हिस्सा: यहाँ घने जंगल और पहाड़ियां हैं, जहाँ आबादी कम है।
- मैदानी इलाका: पश्चिम की ओर बढ़ने पर जमीन उपजाऊ हो जाती है। यहाँ के किसान गेहूं, दालें और कपास (Cotton) जैसी फसलें उगाने के लिए पूरी तरह नर्मदा के पानी पर निर्भर हैं।
5. पर्यटन और कुदरती नज़ारे
नर्मदा का सफर बेहद खूबसूरत है। जबलपुर के पास यह नदी संगमरमर की ऊंची चट्टानों (Marble Rocks) के बीच से गुजरती है, जो देखने में अद्भुत लगता है। यहीं पर स्थित धुआंधार जलप्रपात है, जहाँ नदी का पानी इतनी ऊंचाई और वेग से गिरता है कि धुएं जैसा गुबार बन जाता है।6. आस्था का केंद्र
वैज्ञानिक महत्व के साथ-साथ नर्मदा का धार्मिक महत्व भी बहुत गहरा है। इसे केवल एक जल स्रोत नहीं, बल्कि एक 'जीवंत देवी' माना जाता है।- महेश्वर, ओंकारेश्वर और अमरकंटक जैसे पवित्र तीर्थ स्थल इसी के तट पर हैं।
- हजारों श्रद्धालु हर साल 'नर्मदा परिक्रमा' करते हैं, जो इस नदी के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक है।